कोलकाता: पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य साथी योजना में कथित भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में अब नए खुलासे सामने आ रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने दावा किया है कि उनके घर के पते पर लगातार गुमनाम चिट्ठियां पहुंच रही हैं। इन चिट्ठियों के जरिए कई नर्सिंग होम संचालकों और आम लाभार्थियों ने योजना में कथित गड़बड़ियों से जुड़े सबूत और अहम जानकारियां साझा की हैं। सरकार का कहना है कि इन सूचनाओं की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गुमनाम चिट्ठियों में सामने आ रहे भ्रष्टाचार के सबूत
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, स्वास्थ्य साथी योजना के ऑडिट और शुरुआती जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद से ही उन्हें लगातार बेनाम चिट्ठियां मिल रही हैं। इनमें नर्सिंग होम के मालिकों से लेकर आम लोगों तक ने अपनी पहचान छिपाकर कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारियां भेजी हैं। मंत्री का दावा है कि इन चिट्ठियों में कई महत्वपूर्ण सबूत भी मौजूद हैं, जिनसे जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा का दिया भरोसा
मंत्री ने स्पष्ट किया है कि गुमनाम चिट्ठियों में मिली हर जानकारी की पहले सत्यता जांची जाएगी। यदि आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मिलते हैं, तो शिकायतकर्ताओं की पहचान और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाकर पूछताछ भी की जाएगी। सरकार ने भरोसा दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
20 से 30 हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप
शुरुआती जांच में स्वास्थ्य साथी योजना में करीब 20 से 30 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। दावा है कि योजना में करीब 30 लाख फर्जी लाभार्थियों के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा जाली स्वास्थ्य साथी कार्ड, फर्जी डॉक्टरों, नकली हस्ताक्षरों और अस्पतालों के फर्जी बिलों के जरिए सरकारी पैसे की हेराफेरी किए जाने का आरोप है। स्वास्थ्य मंत्री ने कथित गड़बड़ियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई मामलों में मरीज भी फर्जी था और बीमारी भी फर्जी थी।
आर्थिक फॉरेंसिक ऑडिट से खुलेगी भ्रष्टाचार की परतें
योजना में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए पूरी व्यवस्था का आर्थिक फॉरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है। इस मामले में संदेह के घेरे में आए कई नर्सिंग होम और थर्ड पार्टी बीमा कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, सरकार उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ाए जाने की तैयारी है।
आयुष्मान भारत योजना के सत्यापन के दौरान हुआ खुलासा
राज्य सरकार के अनुसार, केंद्र की आयुष्मान भारत योजना और राज्य की नई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए घर-घर जाकर लाभार्थियों की जानकारी का सत्यापन शुरू किया गया था। इसी प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्य साथी योजना में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं और फर्जी कार्डों का पता चला। अब स्वास्थ्य मंत्री को मिल रही गुमनाम चिट्ठियों में सामने आ रही नई जानकारियों के आधार पर जांच को और आगे बढ़ाया जा रहा है।