तारकेश्वर विधानसभा में बीजेपी उम्मीदवार संतु पान का प्रचार अभियान इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वह गांव-गांव, घर-घर जाकर कभी महिलाओं के आंसू पोंछ रहे हैं तो कभी बुजुर्गों के पैर छूकर समर्थन मांग रहे हैं। उनके इस अंदाज ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है।
TMC पर बढ़ा दबाव
बीजेपी का दावा है कि संतु पान के आक्रामक प्रचार ने मौजूदा विधायक और तृणमूल नेता रामेंदु सिंहराय पर दबाव बढ़ा दिया है। राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पिछले चुनाव का हिसाब-किताब
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के स्वपन दासगुप्ता को रामेंदु सिंहराय ने करीब 7500 वोटों से हराया था। लेकिन इस बार संतु पान के नए और आक्रामक अंदाज ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
तृणमूल में अंदरूनी मतभेद की चर्चा
तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी कुछ असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय नेताओं की सक्रियता और आपसी गुटबाजी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
साधारण परिवार से उठकर राजनीति तक
संतु पान एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। गरीबी से संघर्ष करते हुए उन्होंने पत्रकारिता में पहचान बनाई और अब राजनीति के मैदान में उतरकर सीधे सत्ता पक्ष को चुनौती दे रहे हैं।
गांवों में मिल रहा समर्थन
कुमरुल, बन्ना, साहाबाजार, बालिगोड़ी और अन्य इलाकों में संतु पान को जनता का अच्छा समर्थन मिल रहा है। उनके प्रचार के दौरान लोग भावुक हो रहे हैं और बदलाव की मांग कर रहे हैं।
चुनावी नारे से माहौल गरम
प्रचार के दौरान संतु पान “बदलाव जरूरी है” जैसे नारों के साथ लोगों को संबोधित कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार जनता बदलाव चाहती है और वह इसके लिए पूरी ताकत लगा देंगे।
रामेंदु सिंहराय का पलटवार
वहीं तृणमूल नेता रामेंदु सिंहराय ने संतु पान के प्रचार को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में भावनाओं से नहीं, बल्कि काम से जीत होती है। उन्होंने दावा किया कि इस बार भी वह बड़े अंतर से जीत हासिल करेंगे।