कोलकाता: दक्षिण-पश्चिम कोलकाता के घनी आबादी वाले इलाकों के बीच स्थित विद्यासागर स्टेट जनरल अस्पताल आज राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। बेहाला, न्यू अलीपुर, सरशुना, ठाकुरपुकुर और आसपास के कई इलाकों के लोगों के लिए यह एकमात्र सरकारी स्वास्थ्य सुविधा है, लेकिन लंबे समय से खराब ढांचे और कमजोर सेवाओं के आरोपों के कारण लोगों का भरोसा डगमगाया है।
मरीजों की मजबूरी: विकल्प नहीं, इसलिए अस्पताल का सहारा
अस्पताल में आने वाले कई मरीजों का कहना है कि आर्थिक तंगी के चलते उन्हें यहां आना पड़ता है। एक घायल व्यक्ति ने बताया कि निजी अस्पतालों का खर्च उठाना संभव नहीं है, इसलिए सरकारी अस्पताल ही एकमात्र विकल्प है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यहां गंभीर इलाज और आधुनिक सुविधाओं की कमी साफ दिखाई देती है।
तृणमूल का फोकस: स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता
बेहाला पश्चिम सीट से तृणमूल उम्मीदवार रत्ना चट्टोपाध्याय ने अस्पताल की स्थिति सुधारने को अपनी प्राथमिकता बताया है। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं और यदि उन्हें मौका मिला तो अस्पताल की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने इसे अपनी "टू-डू लिस्ट" में सबसे ऊपर रखा है।
विपक्ष का हमला: भ्रष्टाचार और उपेक्षा पर सवाल
वहीं, बीजेपी और सीपीएम ने इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि अस्पताल की बदहाल स्थिति सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं तक सही तरीके से नहीं मिल पा रही हैं।
चुनावी जंग में स्वास्थ्य बना बड़ा मुद्दा
बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी मुकाबले में स्वास्थ्य सेवाएं अहम मुद्दा बन चुकी हैं। एक ओर तृणमूल सुधार के वादे कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में जुटा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विद्यासागर अस्पताल का मुद्दा चुनावी नतीजों को किस हद तक प्रभावित करता है।