कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आम जनता द्वारा स्वेच्छा से दान किए गए रक्त और प्लाज्मा को ऊंची कीमतों पर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में अवैध रूप से बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग (Swasthya Bhawan) ने इस गंभीर मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कोलकाता समेत कई जिलों के निजी अस्पतालों और ब्लड बैंकों के खिलाफ व्यापक स्तर पर छापेमारी व दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
7 निजी ब्लड बैंक जांच के घेरे में, करोड़ों का घोटाला उजागर
स्वास्थ्य भवन द्वारा स्टॉक और दस्तावेजों के मिलान में सामने आया है कि नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये का खेल रचा गया। चालू वर्ष के पहले छह महीनों में बिना किसी सरकारी अनुमति के लगभग 1.69 करोड़ रुपये मूल्य का रक्त (PRBC) और 4.15 करोड़ रुपये का प्लाज्मा (FFP) दूसरे राज्यों में भेजा गया। कोलकाता के तीन बड़े केंद्रों—पद्मपुकुर के 'हेल्थ पॉइंट', जोधपुर पार्क के 'अशोक ब्लड बैंक' और एंटली स्थित 'लाइफ केयर ब्लड बैंक' के दस्तावेज जब्त किए जा चुके हैं। पद्मपुकुर वाले ब्लड बैंक का कामकाज रोकते हुए उसका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की सिफारिश की गई है। शुरुआती जांच में राज्य के कम से कम 7 निजी ब्लड बैंक इस तस्करी नेटवर्क में सीधे तौर पर शामिल पाए गए हैं।
राज्यव्यापी छापेमारी और नियमों का उल्लंघन
कोलकाता के अलावा हावड़ा, बर्दवान (बामचांदाईपुर), नदिया (कृष्णनगर), अंदाल और रायगंज के कई निजी ब्लड बैंकों में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों ने अचानक छापेमारी कर स्टॉक रजिस्टर और डोनर लिस्ट की जांच की। केवल हावड़ा के एक केंद्र से ही लगभग 10,000 यूनिट रक्त और प्लाज्मा के अवैध ट्रांसफर की विसंगतियां मिली हैं। केंद्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार, एक राज्य से दूसरे राज्य में रक्त या उसके घटकों को भेजने के लिए 'स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल' (SBTC) की लिखित अनुमति अनिवार्य है, जिसका इन संस्थाओं ने पूरी तरह से उल्लंघन किया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खून के इस अवैध कारोबार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।