कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बहुचर्चित 'मेसी कांड' (Lionel Messi Event Controversy) को लेकर विधाननगर दक्षिण थाना पुलिस ने उन्हें एक बार फिर तलब किया है। पुलिस ने अरूप विश्वास को आगामी मंगलवार (7 जुलाई) सुबह 11 बजे तक थाने में हाजिर होने का कड़ा निर्देश दिया है। तीन बार की टालमटोल के बाद 18 जून को पहली बार थाने पहुंचे अरूप विश्वास से पुलिस इस मामले में अब आगे की पूछताछ करेगी।
क्या है पूरा 'मेसी कांड' और आरोप?
पिछले साल दिसंबर महीने में साल्टलेक के युवा भारती क्रीड़ांगन (Yuba Bharati Krirangan) में फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी का एक मेगा इवेंट आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के आयोजक शतद्रु दत्त थे, जिन्हें कार्यक्रम में हुई भारी अव्यवस्था के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में जमानत पर रिहा होने और राज्य में सत्ता बदलने के बाद शतद्रु दत्त ने पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास के खिलाफ धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई।
अरूप विश्वास पर बेहद गंभीर आरोप हैं: टिकट ब्लैक और धोखाधड़ी: आरोप है कि अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्होंने मेसी इवेंट के करीब 22,000 टिकट अवैध रूप से 'हड़प' लिए और उनकी ब्लैक मार्केटिंग की।
मेसी की सुरक्षा में चूक और अनुचित व्यवहार: लियोनेल मेसी की खुद की मैनेजमेंट टीम ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर अरूप विश्वास के आचरण पर गंभीर आपत्ति जताई थी। पत्र में कहा गया था कि तत्कालीन खेल मंत्री बिना अनुमति के मैदान में घुस गए और फोटो खिंचवाने के चक्कर में मेसी के बेहद करीब जाने की कोशिश की। उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर मेसी के कंधे और कमर पर हाथ रखा, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। मेसी की टीम ने मैदान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी तीव्र असंतोष व्यक्त किया था।
हाई कोर्ट में पेश होगी ६ महीने की जांच रिपोर्ट
विधाननगर दक्षिण थाना पुलिस पिछले ६ महीनों से इस पूरे घोटाले की जांच कर रही है। आगामी 10 जुलाई को पुलिस इस मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट कोलकाता हाई कोर्ट में सौंपने वाली है। कोर्ट में रिपोर्ट जमा करने के ठीक तीन दिन पहले पुलिस अरूप विश्वास से अंतिम दौर की पूछताछ कर अपनी रिपोर्ट को पुख्ता करना चाहती है।
हालांकि, कोलकाता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत राय के निर्देशानुसार अरूप विश्वास को पुलिस जांच में सहयोग करना अनिवार्य है, लेकिन कोर्ट ने उन्हें 17 अगस्त तक के लिए अंतरिम राहत (कवच) भी दे रखी है। इस अवधि तक पुलिस उनके खिलाफ कोई भी कठोर दंडात्मक कदम नहीं उठा सकती।
बदले राजनीतिक समीकरण: 'दीदी' का साथ छोड़ ऋतब्रत गुट में शामिल
कानूनी पचड़ों के बीच अरूप विश्वास ने अपना राजनीतिक पासा भी पलट लिया है। मेसी कांड में पुलिस की तरफ से शिकंजा कसने और लगातार पूछताछ के बाद उन्होंने 'दीदी' (ममता बनर्जी) का साथ छोड़ दिया है। वह तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट यानी वर्तमान ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए हैं, जहां उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष (Vice President) बनाया गया है। अब देखना यह होगा कि 7 जुलाई की पूछताछ और 10 जुलाई को कोर्ट में पेश होने वाली पुलिस रिपोर्ट के बाद इस मामले का ऊंट किस करवट बैठता है।