कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक ऐसा फैसला लिया गया है, जिसने संसदीय कार्यप्रणाली को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। विधानसभा के इतिहास में पहली बार किसी मार्शल को निलंबित किया गया है। मार्शल देवव्रत मुखोपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
विधायकों की शिकायत बनी कार्रवाई का आधार
विधानसभा सूत्रों के अनुसार, विभिन्न दलों के कई विधायकों ने मार्शल के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर आपत्ति जताई थी। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि सदन के सदस्यों के साथ अपेक्षित शालीनता और पेशेवर तरीके से व्यवहार नहीं किया जा रहा था। इन शिकायतों की समीक्षा के बाद प्रशासन ने कार्रवाई का फैसला लिया।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भी उठे सवाल
सूत्रों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मौजूदगी में आयोजित विधायकों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान भी मार्शल की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे। कार्यक्रम के दौरान जिम्मेदारियों के निर्वहन में कथित अनियमितताओं और समन्वय की कमी को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
विभागीय जांच में तय होगी आगे की कार्रवाई
निलंबन के साथ ही विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच के दौरान लगाए गए सभी आरोपों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।
सचिव ने टिप्पणी करने से किया इनकार
पूरे घटनाक्रम पर विधानसभा सचिव सौमेंद्र नाथ दास ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। वहीं, विधानसभा प्रशासन की ओर से भी अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
इस अभूतपूर्व फैसले के बाद विधानसभा की प्रशासनिक व्यवस्था, सदन की कार्यप्रणाली और मार्शल की जिम्मेदारियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।