कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और निजी क्लिनिकल संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वेस्ट बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमीशन का पुनर्गठन किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से 5 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, 13 सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है, जिसकी कमान सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस बिस्वजीत बोस को सौंपी गई है।
पूर्व IAS अधिकारी मुमिता गोदारा बसु बनीं उपाध्यक्ष
नई अधिसूचना के मुताबिक, पूर्व आईएएस अधिकारी मुमिता गोदारा बसु को आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है। आयोग में चिकित्सा, प्रशासन और कानून से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि राज्य के क्लिनिकल संस्थानों के पंजीकरण, नियमन और पारदर्शिता से जुड़े मामलों की प्रभावी निगरानी की जा सके।
कोलकाता पुलिस के पूर्व IPS गौतम मोहन चक्रवर्ती भी शामिल
आयोग के सदस्यों में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी गौतम मोहन चक्रवर्ती, जो कोलकाता पुलिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं, को भी जगह दी गई है। इसके अलावा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नारायण बनर्जी, डॉ. संदीप राय, डॉ. धनपत राम अग्रवाल, डॉ. नारायण चक्रवर्ती, डॉ. मधुमिता दोबे, डॉ. श्यामासिस बंद्योपाध्याय सहित कई विशेषज्ञों को सदस्य बनाया गया है। मेडिकल एजुकेशन के निदेशक भी आयोग के सदस्य होंगे।
2017 के कानून के तहत हुआ पुनर्गठन
सरकार ने यह पुनर्गठन वेस्ट बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन, रेगुलेशन एंड ट्रांसपेरेंसी) एक्ट, 2017 की धारा 36 के तहत किया है। अधिसूचना के अनुसार, आयोग को अधिनियम के तहत निर्धारित सभी शक्तियां और दायित्व प्राप्त होंगे तथा यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता पर रहेगा फोकस
राज्य सरकार का मानना है कि नए आयोग के गठन से क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स के संचालन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी। आयोग निजी अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के नियमन, शिकायतों के निस्तारण तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।