कोलकाता: पश्चिम बंगाल में डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। बैठक में राज्य में डेंगू की मौजूदा स्थिति, संक्रमित मरीजों की संख्या और बीमारी की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियानों की विस्तार से समीक्षा की गई।
नवंबर तक निगरानी रखने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डेंगू की रोकथाम के लिए निगरानी अभियान को सिर्फ मानसून तक सीमित न रखा जाए। नवंबर तक लगातार सर्विलांस जारी रखने और संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। सरकार का फोकस डेंगू के मामलों की जल्द पहचान और संक्रमण को फैलने से रोकने पर है।
पिछले साल की तुलना में इस बार कम मामले
बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक पश्चिम बंगाल में 4 हजार से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले साल इसी अवधि में करीब 7,600 मामले सामने आए थे। इस लिहाज से इस साल संक्रमण के मामलों में कमी दर्ज की गई है। हालांकि, सरकार इसे लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं चाहती।
राज्य में 148 एक्टिव मरीज
मुख्यमंत्री के अनुसार, फिलहाल राज्य में 148 सक्रिय डेंगू मरीज हैं। इस साल डेंगू से एक मौत की भी जानकारी सामने आई है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
कोलकाता के 12 वार्डों पर विशेष नजर
कोलकाता में भी डेंगू की स्थिति की समीक्षा की गई। बताया गया कि कोलकाता नगर निगम के 12 वार्डों में डेंगू के मामले सामने आए हैं, जबकि 61 वार्डों में फिलहाल डेंगू का कोई मामला नहीं बताया गया है। संक्रमण वाले क्षेत्रों में रोकथाम के उपायों को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुर्शिदाबाद और नदिया के इलाकों पर भी फोकस
बैठक में राज्य के ग्रामीण और जिला क्षेत्रों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुर्शिदाबाद के नौदा और नदिया के चाकदह जैसे इलाकों में डेंगू के मामलों को लेकर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। स्थानीय प्रशासन को संक्रमण की स्थिति के अनुसार जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
बुखार के मरीजों की पहचान पर जोर
स्वास्थ्य विभाग और ASHA कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान करने के लिए कहा गया है। संदिग्ध मामलों में समय पर डेंगू की जांच कराने और मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। साथ ही पर्याप्त संख्या में टेस्टिंग किट उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने की मुहिम
डेंगू की रोकथाम के लिए सिर्फ मरीजों की पहचान ही नहीं, बल्कि मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाने को भी प्राथमिकता दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में पानी जमा होने वाली जगहों की पहचान कर उन्हें साफ करने, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने और जरूरत के मुताबिक फॉगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ इलाकों में मच्छरदानी वितरण पर भी जोर दिया गया है।
डेंगू के मामलों की जानकारी छिपाने पर सख्ती
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों को डेंगू के मामलों की सही जानकारी दर्ज करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले को छिपाने के बजाय उसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाना जरूरी है। सही आंकड़े मिलने से सरकार को संक्रमण वाले क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलेगी।