कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगातार बढ़ते दुर्गा पूजा के बजट पर इस बार बड़ा ब्रेक लग गया है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में कभी करोड़ों रुपये के बजट से भव्य पंडाल और लाइटिंग सजाने वाले कई नामी 'बिग बजट' पूजा क्लबों ने इस साल अपने आयोजनों का दायरा घटा दिया है। राज्य की नई प्रशासनिक व्यवस्था में मुख्यमंत्री सुवेंदु सरकार द्वारा पूजा आयोजनों में राजनीति और भ्रष्टाचार से दूरी बनाए रखने के सख्त रुख के बाद पूजा कमिटियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आगामी दुर्गा पूजा उत्सव से ठीक पहले कई प्रमुख आयोजक भारी बजट कटौती के साथ पारंपरिक और सादे तरीके से पूजा संपन्न कराने की तैयारी में जुट गए हैं।
नए नियमों और प्रशासनिक जांच का दिखने लगा असर
पिछली राज्य सरकारों के दौरान उत्तर से लेकर दक्षिण कोलकाता तक की कई बड़ी दुर्गा पूजाओं का सीधा संबंध प्रमुख नेताओं, मंत्रियों या पार्षदों से रहा है। उस दौर में स्पॉन्सरशिप के अलावा अन्य वित्तीय स्रोतों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था और कई कमिटियों पर सही तरीके से ऑडिट न कराने के आरोप भी लगे। लेकिन अब नए प्रशासनिक निर्देशों के तहत पूजा आयोजनों में पूरी पारदर्शिता और नियमों का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। बिना उचित अनुमति और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर पुलिस प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है, जिसका सीधा असर आयोजकों की तैयारियों पर पड़ा है।
श्रीभूमि से लेकर दमदम तक: कई बड़े पंडालों की चमक पड़ी फीकी
इस साल कई चर्चित दुर्गा पूजा कमिटियों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है:
- श्रीभूमि स्पॉर्टिंग क्लब: लेकटाउन स्थित इस प्रसिद्ध पूजा के मुख्य संरक्षक और पूर्व मंत्री सुजीत बसु के जेल में होने के बाद नई कमिटी ने स्पष्ट किया है कि भव्य थीम, लेजर शो और भारी-भरकम गहनों की जगह इस बार स्थानीय लोगों को साथ लेकर सादगी के साथ पूजा आयोजित होगी।
- दमदम दक्षिणपाड़ा सर्वजनीन: बीते दो-तीन सालों में भव्य सजावट और हस्तियों की मौजूदगी के लिए मशहूर इस पूजा का बजट इस बार काफी सीमित कर दिया गया है।
- बोनहुगली नपाड़ा दादाभाई संघ: अपने भव्य आकर्षण के लिए पहचाने जाने वाले इस क्लब के पंडाल की जगह पर पूजा से कुछ समय पहले तक कोई बड़ा तामझाम नजर नहीं आ रहा है।
- अर्जुनपुर अमरा सबाई क्लब: प्रसिद्ध कलाकार भवतोष सुतार के निर्देशन में कई पुरस्कार जीतने वाली इस पूजा को इस बार पुलिस निरीक्षण के बाद बड़े पैमाने पर आयोजन की अनुमति नहीं मिली। अब कलाकार सुबिन भट्टाचार्य और शम्पा भट्टाचार्य सीमित बजट में अपनी थीम तैयार कर रहे हैं।
- अन्य इलाके: सॉल्ट लेक की कई पूजाओं के साथ-साथ लेकटाउन का दक्षिणदाड़ी सर्वजनीन भी इस बार अपने पंडाल का आकार छोटा कर रहा है।

दक्षिण कोलकाता की स्थिति और पुरानी कमिटियों में बदलाव
दक्षिण कोलकाता के चेतला अग्रणी और सुरुचि संघ जैसी कुछ प्रमुख पूजाओं में अब तक भव्यता बरकरार रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, पूर्वांचल शक्ति संघ के समर्थकों को इस बार कुछ निराशा हाथ लग सकती है। वहीं, पूर्व पार्षद बाप्पादित्य दासगुप्ता की गिरफ्तारी के बाद संकट में फंसी केन्दुआ शांति संघ की नई कमिटी ने खूंटी पूजा का आयोजन जरूर किया है, लेकिन पूजा के अंतिम स्वरूप को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
कुम्हारटोली में भी असर: पारंपरिक मूर्तियों की मांग बढ़ी
बजट में कटौती और थीम आधारित आयोजनों में आई कमी का सीधा असर कोलकाता के पारंपरिक मूर्तिकारों पर भी पड़ा है। कुम्हारटोली (Kumartuli) के मूर्तिकारों के अनुसार, इस साल थीम आधारित मूर्तियों के ऑर्डर आधे रह गए हैं। प्रसिद्ध मृत्तिकार नवकुमार पाल के अनुसार, जहां पिछले साल उन्हें 12 थीम मूर्तियों के ऑर्डर मिले थे, वहीं इस बार केवल 6 ऑर्डर ही आए हैं। इसके साथ ही मिट्टी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रतिमाओं के दाम में उस अनुपात में बढ़ोतरी न होने से कलाकार भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।