कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने वाले वाम मोर्चे (Left Front) के घटक दलों के लिए 2026 का विधानसभा चुनाव महज सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने का संघर्ष बन गया है। सत्ता से दूर होने के डेढ़ दशक बाद अब हालत यह है कि इन दलों के पास न तो चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त फंड बचा है और न ही झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता।
फॉरवर्ड ब्लॉक: 23 सीटों पर उम्मीदवार, लेकिन सदस्य सिर्फ 5 हजार
नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित फॉरवर्ड ब्लॉक इस बार 23 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे राज्य में पार्टी के सक्रिय सदस्यों की संख्या घटकर मात्र 5,000 रह गई है। मध्यमग्राम से उम्मीदवार संजीव चटर्जी स्वीकार करते हैं कि "लड़ाई कठिन है, पैसा और लोग दोनों कम हैं।" कभी बारसात, देगंगा और बागदा जैसे किलों पर राज करने वाली पार्टी आज अपने ही गठबंधन सहयोगी ISF के साथ 'दोस्ताना मुकाबले' (Conflict) में फंसी है।
CPI: पौने तीन लाख से 28 हजार पर सिमटा कुनबा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही इस पार्टी के सदस्यों की संख्या जो कभी 2.75 लाख हुआ करती थी, आज घटकर मात्र 28,000 रह गई है। पार्टी की कंगाली का आलम यह है कि नंदीग्राम से उम्मीदवार शांति गिरी को चुनाव प्रचार के दौरान QR कोड दिखाकर लोगों से आर्थिक मदद मांगनी पड़ रही है। राज्य सचिव स्वपन बनर्जी का कहना है, "फंड नहीं है, इसलिए जनता के भरोसे हैं।"
RSP: गढ़ ढहे, अब दीवारों पर लिखने वाले भी नहीं
सुंदरवन और उत्तर बंगाल में दबदबा रखने वाली RSP के पास अब केवल 15,000 सदस्य बचे हैं। पूर्व मंत्री सुभाष नस्कर बताते हैं कि गोसाबा और बसंती जैसे इलाकों में, जहाँ कभी RSP का एकछत्र राज था, आज वहां पार्टी के पास दीवार लेखन (Wall Painting) के लिए भी लोग नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि पार्टी फंड की कमी के कारण इस बार पोस्टर और फेस्टून की संख्या में भी भारी कटौती की गई है।
संकट में भविष्य: क्या इतिहास बन जाएंगे ये दल?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने और सत्तारूढ़ दल के कथित दबाव के कारण इन छोटे वामपंथी दलों का कैडर बेस पूरी तरह बिखर चुका है। 2026 का यह चुनाव तय करेगा कि 'सिंह' (Forward Block), 'हंसिया और धान की बाली' (CPI) और 'फावड़ा-बेलचा' (RSP) जैसे प्रतीक बंगाल की चुनावी EVM में अपनी जगह बचा पाते हैं या हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएंगे।