कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रशासनिक विभागों को विभिन्न मदों के तहत वार्षिक बजट का 50 प्रतिशत तक फंड जारी करने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय पश्चिम बंगाल विनियोग (संख्या-2) विधेयक, 2026 को राज्य विधानसभा से पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है। राज्य के वित्त विभाग का मानना है कि इस फैसले से सरकारी योजनाओं, कर्मचारियों के वेतन, छात्रवृत्ति और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
वेतन, पेंशन और छात्रवृत्ति के लिए 50% तक राशि जारी होगी
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी प्रशासनिक विभाग अब अपने वार्षिक बजट आवंटन का 50 प्रतिशत तक वेतन, वेतन अनुदान, मजदूरी, पेंशन तथा स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत दी जाने वाली छात्रवृत्ति और वजीफों के भुगतान के लिए जारी कर सकेंगे। इससे सरकारी कर्मचारियों और लाभार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
गैर-वेतन खर्चों पर भी लागू होगा नया नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (SDRF) को छोड़कर अन्य सभी गैर-वेतन व्यय मदों में भी 50 प्रतिशत तक फंड जारी किया जा सकेगा। हालांकि, विभागों को अपने प्रत्यायोजित वित्तीय अधिकारों के दायरे में रहकर ही खर्च की स्वीकृति देनी होगी। यह व्यवस्था सब्सिडी तथा ऋण एवं अग्रिम जैसी मदों पर लागू नहीं होगी।
PSU को भी मिलेगी राहत
राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को भी वेतन और मजदूरी के भुगतान के लिए वार्षिक बजट का 50 प्रतिशत तक उपयोग करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, उन्हें पहले उपलब्ध जमा शेष राशि का उपयोग करना होगा और उसके बाद केवल वास्तविक मासिक आवश्यकता के अनुसार ही अतिरिक्त राशि जारी की जाएगी।
विकास परियोजनाओं को मिलेगी गति
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से विभिन्न विभागों की प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आएगी और स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे विकास कार्यों में अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है। वित्त विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से विभागों को शुरुआती महीनों में आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगा और सरकारी सेवाओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।