कोलकाता: पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद कई जरूरी प्रशिक्षण, पुनश्चर्या और शैक्षणिक कार्यक्रम लगभग बंद हो गए हैं। उनके मुताबिक, उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों का देश और दुनिया में हो रहे बदलावों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को अपनी सीमाओं तक सीमित रहने के बजाय राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। वित्त मंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को दोबारा शुरू करने और अन्य राज्यों तथा केंद्र के साथ संबंध मजबूत करने को प्राथमिकता बताया। साथ ही उन्होंने राज्य पर करीब 8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को भी बड़ी चुनौती बताया।
कोरोना के बाद बंद हुए कई प्रशिक्षण कार्यक्रम
स्वप्न दासगुप्ता ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान और उसके बाद उच्च शिक्षा से जुड़े कई जरूरी कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं। शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों में काफी कमी आई है। पुनश्चर्या कार्यक्रमों के बंद होने से शिक्षकों को नए बदलावों और आधुनिक शैक्षणिक तरीकों से जुड़ने का अवसर भी कम हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले दूसरे राज्यों और देश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ कई तरह के पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। लेकिन समय के साथ इन गतिविधियों में काफी गिरावट आई है। वित्त मंत्री ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए व्यवस्था को फिर से सक्रिय करने की जरूरत पर जोर दिया।
देश-दुनिया के बदलावों से जुड़ना जरूरी
वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था को केवल राज्य तक सीमित रखना सही नहीं होगा। भारत के अलग-अलग राज्यों और दुनिया के अन्य हिस्सों में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग और बदलाव हो रहे हैं। नई शिक्षण पद्धतियां, तकनीक और शोध के नए क्षेत्र तेजी से सामने आ रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए इन बदलावों की जानकारी रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल इन राष्ट्रीय और वैश्विक बदलावों से कट गया, तो राज्य की शिक्षा व्यवस्था की प्रासंगिकता प्रभावित हो सकती है। इसलिए शिक्षकों और संस्थानों को लगातार सीखने और नई व्यवस्थाओं से जुड़ने के अवसर देने होंगे।
अन्य राज्यों और केंद्र के साथ मजबूत होगा संपर्क
स्वप्न दासगुप्ता ने कहा कि उनकी प्राथमिकता प्रशिक्षण और पुनश्चर्या कार्यक्रमों को फिर से शुरू करना है। इसके लिए देश के अन्य राज्यों के उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। उन्होंने केंद्र के साथ भी संस्थागत स्तर पर संवाद और सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। वित्त मंत्री के अनुसार, पहले अलग-अलग राज्यों और संस्थानों के बीच जिस तरह का संपर्क और संवाद था, वह समय के साथ कमजोर हुआ है। इस संपर्क को दोबारा मजबूत करना जरूरी है ताकि पश्चिम बंगाल के शिक्षक और विद्यार्थी देश के अन्य हिस्सों से जुड़ सकें। इससे शैक्षणिक अनुभवों और नए विचारों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिल सकता है।
खोया स्थान वापस हासिल करने की चुनौती
वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि शिक्षा के क्षेत्र में जो स्थान राज्य ने पहले बनाया था, उसे दोबारा हासिल किया जाए। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही। उनके मुताबिक, राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका फिर से मजबूत करनी होगी। इसके लिए केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग भी जरूरी होगा। प्रशिक्षण, शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि लगातार प्रयासों के जरिए पश्चिम बंगाल को देश के व्यापक शैक्षणिक परिदृश्य से फिर मजबूती से जोड़ा जा सकता है।
8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का भी जिक्र
स्वप्न दासगुप्ता ने बजट तैयार करने के दौरान राज्य पर करीब 8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल के सामने मौजूद बड़ी वित्तीय चुनौतियों में से एक बताया। उनके मुताबिक, राज्य के विकास और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संसाधनों की जरूरत होगी और इसके साथ राज्य की वित्तीय स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर वित्तीय दबाव भी बना हुआ है। वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि इन दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तैयार करनी होगी।
क्या है बड़ी बात?
स्वप्न दासगुप्ता के बयान से संकेत मिलता है कि पश्चिम बंगाल में उच्च शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षण और पुनश्चर्या कार्यक्रमों को फिर से सक्रिय करने की तैयारी है। सरकार का जोर शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों को देश-दुनिया में हो रहे बदलावों से जोड़ने पर रहेगा। इसके साथ ही अन्य राज्यों और केंद्र के साथ शैक्षणिक एवं संस्थागत संपर्क बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। इससे शिक्षकों को नए पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धतियों और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ने के अधिक अवसर मिल सकते हैं। वहीं, राज्य पर करीब 8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज सरकार के सामने एक बड़ा वित्तीय दबाव बना हुआ है। ऐसे में उच्च शिक्षा में सुधार और वित्तीय चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए अहम परीक्षा होगी।