कोलकाता: पश्चिम बंगाल में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा प्लान तैयार किया है। कोलकाता में आयोजित 'कैपिटल मार्केट कॉन्क्लेव' के 12वें कार्यक्रम में राज्य के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि आने वाले स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को राज्य सरकार अपनी नई औद्योगिक और प्रोत्साहन नीति (New Industrial Policy) लागू करेगी। इस नीति में उद्योगों को वित्तीय छूट और मदद (Fiscal Incentives) देने पर खास ध्यान दिया जाएगा।
पुरानी छवि को बदलना और नए निवेश को आकर्षित करना
वित्त मंत्री ने माना कि बीते समय में पश्चिम बंगाल की छवि अशांति और 'व्यापार करने में मुश्किलों' के कारण थोड़ी प्रभावित हुई थी। सरकार का मुख्य उद्देश्य अब इस नकारात्मक छवि को पूरी तरह से बदलकर एक सकारात्मक माहौल बनाना है। उन्होंने देश के सभी बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों को बंगाल में फिर से आने का न्योता दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 21वीं सदी की नई तकनीक और तरक्की के साथ चल रहा यह राज्य उन्हें निराश नहीं करेगा।
नई जमीन नीति और बंद पड़ी फैक्ट्रियों का इस्तेमाल
राज्य के विकास के लिए सरकार एक नई और बेहतर जमीन नीति (Land Policy) पर काम कर रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य में लंबे समय से जो फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं, उनकी खाली जमीन को एक मूल्यवान संपत्ति माना जाएगा और उसका दोबारा इस्तेमाल (Reuse) किया जाएगा।
इस योजना के तहत जमीन नीति को तीन हिस्सों में बांटा जा रहा है, जिसमें जमीन को इकट्ठा करना (Land Pooling) और बढ़ती मांग के कारण सरकारी जमीन का सही इस्तेमाल शामिल है। इसके लिए गुजरात और हरियाणा के मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है, जहां जमीन देने वाले मालिकों को भविष्य के विकास में मुनाफा और हिस्सेदारी मिलती है। इसके साथ ही, कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज से जुड़े प्रस्तावों और राज्य में एक 'गिफ्ट सिटी' बनाने के सुझावों पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
कुशल युवाओं का पलायन रोकना बड़ी चुनौती
डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पास हुनरमंद और पढ़े-लिखे युवाओं की कमी नहीं है। लेकिन राज्य में रोजगार के पर्याप्त मौके न होने के कारण यहां के युवाओं को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमें राज्य में एक ऐसा माहौल बनाना होगा जिससे नया निवेश आए, नौकरियां पैदा हों और हमारे राज्य की प्रतिभाएं बाहर न जाएं।
इसी कार्यक्रम में केडिया सिक्योरिटीज के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री विजय केडिया ने बताया कि 1960 के दशक में देश की जीडीपी (GDP) में पूर्वी भारत का योगदान 21% था, जो आज घटकर सिर्फ 12% रह गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को सुधारने के लिए पूर्वी भारत की ज्यादा से ज्यादा कंपनियों का शेयर बाजार में शामिल (List) होना जरूरी है।
आर्थिक मजबूती के लिए सीमा सुरक्षा है जरूरी
राज्य की आर्थिक तरक्की के लिए सिर्फ नीतियां बनाना काफी नहीं है, बल्कि राज्य की सीमाओं को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। बैठक में यह बात भी सामने आई कि पश्चिम बंगाल की सीमाएं काफी संवेदनशील रही हैं, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए सुरक्षित करना बेहद आवश्यक है। इस सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री जल्द ही सीमावर्ती इलाकों का दौरा करेंगे। एक सुरक्षित और शांत पश्चिम बंगाल ही बड़े निवेश और व्यापार के लिए सबसे सही जगह बन सकता है।