कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नदी आधारित पर्यटन और हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। शनिवार, 29 अगस्त 2026 को पर्यटन एवं संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (WBTDCL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) के बीच महत्वपूर्ण कार्य आदेश सौंपा गया। इस परियोजना के तहत 100 यात्रियों की क्षमता वाली दो हाइब्रिड इलेक्ट्रिक फेरी तैयार की जाएंगी। इसके अलावा उत्तर बंगाल के जल्दपारा में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए दो बेली ब्रिज का भी निर्माण किया जाएगा।
गंगा पर बनेगा नया 'लिटिल यूरोप' पर्यटन कॉरिडोर
परियोजना का सबसे अहम हिस्सा हुगली नदी के किनारे विकसित होने वाला 'लिटिल यूरोप बाय द गंगा' कॉरिडोर है। इसका उद्देश्य बाबूघाट से मायापुर तक नदी मार्ग के जरिए धार्मिक, ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत वाले पर्यटन स्थलों को जोड़ना है। इस जलमार्ग से दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, बंसबेरिया का हंसेश्वरी मंदिर और बैरकपुर का अन्नपूर्णा मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों को जोड़ने की योजना है। वहीं बैरकपुर, श्रीरामपुर, चंदननगर और बंदेल जैसे ऐतिहासिक एवं औपनिवेशिक विरासत वाले क्षेत्रों को भी रिवर टूरिज्म नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
पर्यावरण के अनुकूल होंगी नई फेरी
GRSE द्वारा तैयार की जाने वाली दोनों फेरी आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से लैस होंगी। ये ट्विन-हल कैटामारैन डिजाइन पर आधारित होंगी, जिससे पानी में बेहतर स्थिरता और सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
फेरी में प्रमुख रूप से:
- लिथियम-आयन बैटरी
- सोलर पैनल इंटीग्रेशन
- इमरजेंसी पावर बैकअप
- आधुनिक अग्निशमन प्रणाली
- करीब 100 यात्रियों की क्षमता
जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
GRSE के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने परियोजना को लेकर निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने का भरोसा दिया है। योजना के मुताबिक दोनों हाइब्रिड फेरी का निर्माण 15 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है।
₹45 करोड़ से अधिक की परियोजना
पूरी परियोजना की अनुमानित लागत ₹45.024 करोड़ बताई गई है। इसके लिए केंद्र सरकार की Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI) योजना के तहत 'Development of Iconic Tourist Centres to Global Scale' पहल से वित्तीय सहायता दी जा रही है।रिवर टूरिज्म को प्रभावी बनाने के लिए केवल फेरी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को भी विकसित किया जाएगा।
कई जगह बनेंगे चार्जिंग स्टेशन और जेट्टी
परियोजना के तहत बैरकपुर, श्रीरामपुर, चंदननगर और हुगली में इलेक्ट्रिक फेरी के लिए चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाने की योजना है। इसके अलावा कोलकाता, बैरकपुर, श्रीरामपुर, चंदननगर, हुगली, अंबिका कालना, मतियारा, नादिया और बराहनगर में नई जेट्टी और पोंटून सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे भविष्य में नदी मार्ग से पर्यटकों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
जल्दपारा में दो बेली ब्रिज से सुधरेगी कनेक्टिविटी
परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के जल्दपारा से जुड़ा है। यहां अरण्य टूरिज्म प्रॉपर्टी के पास पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद कनेक्टिविटी की समस्या पैदा हुई थी। इसे दूर करने के लिए GRSE की ओर से दो बेली ब्रिज बनाए जाएंगे। निर्माण कार्य में IIEST शिबपुर के विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है, विशेष रूप से नींव और फाउंडेशन इंजीनियरिंग से जुड़े तकनीकी पहलुओं में। इससे जल्दपारा क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही और स्थानीय कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
पर्यटन मंत्री ने बताया केंद्र-राज्य सहयोग का उदाहरण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने परियोजना को पश्चिम बंगाल के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हरित परिवहन, आधुनिक बुनियादी ढांचे और नदी आधारित पर्यटन को एक साथ आगे बढ़ाने से राज्य को नए पर्यटन अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन मोबिलिटी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
रिवर टूरिज्म से रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
नई हाइब्रिड फेरी, जेट्टी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद हुगली नदी के किनारे मौजूद धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को एक ही पर्यटन नेटवर्क में जोड़ने का रास्ता खुल सकता है। अगर परियोजना तय समयसीमा के अनुसार पूरी होती है, तो यह पश्चिम बंगाल में इको-फ्रेंडली नदी परिवहन, विरासत पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने वाली प्रमुख पहलों में शामिल हो सकती है।