डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज टाकेडा फार्मास्यूटिकल्स की एंटी-डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा का भारत के प्राइवेट मार्केट में प्रमोशन और वितरण करेगी। दोनों कंपनियों ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। यह वैक्सीन बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए होगी। क्यूडेंगा भारत की पहली डेंगू वैक्सीन है जिसका मार्केटिंग ऑथराइजेशन जुलाई में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से मिल चुका है। वैक्सीन की कीमत अभी तय नहीं हुई है। दोनों कंपनियां स्वास्थ्य पेशेवरों से जुड़ाव, बीमारी के प्रति जागरूकता और वितरण पर मिलकर काम करेंगी।
वैक्सीन की उपलब्धता और प्राथमिकताएं
टाकेडा के इंटरकांटिनेंटल मार्केट्स हेड महेंद्र नायक ने बताया कि मार्केटिंग ऑथराइजेशन जुलाई में मिला है इसलिए फिलहाल स्थानीय प्रक्रियाओं को पूरा करना प्राथमिकता है। वाणिज्यिक वितरण शुरू होने से पहले ये प्रक्रियाएं जरूरी हैं। कीमत को लेकर अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। नायक ने कहा कि डॉ रेड्डीज के साथ सहयोग से प्राइवेट मार्केट में पात्र व्यक्तियों तक वैक्सीन पहुंचाने का रास्ता खुलेगा। सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करना दीर्घकालिक लक्ष्य है लेकिन फिलहाल प्राइवेट उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित है। आगे की जानकारी उचित समय पर दी जाएगी।
क्यूडेंगा किन उम्र के लोगों के लिए
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने क्यूडेंगा को 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए मंजूरी दी है। यह व्यापक आयु वर्ग को कवर करती है जिससे बच्चे और वयस्क दोनों लाभान्वित हो सकेंगे। डेंगू भारत में साल भर होने वाली बीमारी है और सभी चार सीरोटाइप सक्रिय हैं। वैक्सीन के आने से रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठेगा। प्राइवेट मार्केट में उपलब्ध होने से जो लोग चाहें वे इसे लगवा सकेंगे। नियामक आवश्यकताओं के अनुसार ही प्रमोशन और वितरण किया जाएगा।
डेंगू की चुनौती और वैक्सीन की जरूरत
डेंगू भारत में एक गंभीर और बदलती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी के अध्ययन के अनुसार देश के कई क्षेत्रों में डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप एक साथ सक्रिय हैं। 14 में से एक मरीज में एक साथ कई सीरोटाइप पाए गए। साल भर मामले सामने आने के कारण रोकथाम और प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया है। क्यूडेंगा जैसी वैक्सीन इस चुनौती से निपटने में सहायक साबित हो सकती है। जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
आगे की राह और उम्मीदें
2027 की पहली छमाही में क्यूडेंगा के भारत में आने की संभावना है। डॉ रेड्डीज का व्यापक वितरण नेटवर्क वैक्सीन को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में मदद करेगा। कीमत तय होने और स्थानीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही व्यावसायिक उपलब्धता शुरू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन डेंगू के बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने तक प्राइवेट मार्केट के जरिए पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। दोनों कंपनियों का सहयोग भारत में डेंगू नियंत्रण प्रयासों को नई गति दे सकता है।