भारत लंबे समय से दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश माना जाता है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है। अब भारतीय आम केवल उत्पादन के मामले में ही नहीं, बल्कि निर्यात के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। बेहतर गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और तेज लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के कारण भारतीय आमों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।
निर्यात से हुई 470 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई
Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का निर्यात किया। इस निर्यात से देश को 470 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। यह आंकड़ा भारतीय कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और दर्शाता है कि वैश्विक बाजार में भारतीय फलों की मांग लगातार बढ़ रही है।
UAE बना भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार
भारतीय आमों के सबसे बड़े आयातक के रूप में UAE अपनी स्थिति बनाए हुए है। इसके अलावा US, UK, Qatar, कुवैत और सिंगापुर जैसे देशों में भी भारतीय आमों की मांग तेजी से बढ़ी है। विशेष रूप से सिंगापुर के सुपरमार्केटों में भारतीय आमों की बिक्री को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है, जहां उपभोक्ता विभिन्न किस्मों को हाथोंहाथ खरीद रहे हैं।
अल्फांसो अब भी बना हुआ है ‘आमों का राजा’
महाराष्ट्र का प्रसिद्ध अलफोंजो आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज भी सबसे लोकप्रिय भारतीय आम माना जाता है। इसकी मिठास, खुशबू और गुणवत्ता विदेशी ग्राहकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। इसके अलावा गुजरात का केसर, दक्षिण भारत का तोतापरी तथा उत्तर भारत के लंगड़ा और चौसा आम भी विदेशी बाजारों में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। खासकर केसर आम की किफायती कीमत और बेहतर स्वाद ने इसकी मांग में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
आधुनिक तकनीक ने बढ़ाई वैश्विक पहुंच
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आम निर्यात से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं में बड़ा सुधार किया है। कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और फाइटोसैनिटरी मानकों के पालन से भारतीय आमों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ी है। इसके साथ ही APEDA और भारतीय दूतावासों द्वारा विदेशों में आयोजित फूड फेस्टिवल और प्रचार अभियानों ने भारतीय आमों की ब्रांडिंग को नई मजबूती प्रदान की है।
चुनौतियों के बावजूद जारी है सफलता का सफर
हालांकि निर्यात क्षेत्र में कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। सीमित उत्पादन सीजन, महंगी एयर कार्गो लागत और कई देशों के कड़े आयात नियम निर्यातकों के सामने बड़ी बाधाएं हैं। इसके बावजूद भारतीय आमों की वैश्विक लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात अवसंरचना को और मजबूत किया गया तो आने वाले वर्षों में भारत आम निर्यात से और अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर सकता है।