मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 (सोमवार) से शुरू होने जा रहा है। इस बार का सत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष भी जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में सदन के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं।
मानसून सत्र से पहले 19 जुलाई को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अपने-अपने विधायक दल की बैठक करेंगे। इन बैठकों में सदन की रणनीति, विभिन्न विधेयकों पर पार्टी का रुख और विपक्ष तथा सरकार के जवाबी तेवर तय किए जाएंगे।
UCC विधेयक रहेगा सरकार की प्राथमिकता
इस मानसून सत्र का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक को माना जा रहा है। राज्य सरकार पिछले डेढ़ से दो महीनों से इसकी तैयारियों में जुटी हुई है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति अपनी रिपोर्ट और विधेयक का मसौदा सरकार को सौंप चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए मुख्य सचिव अनुराग जैन को भेज दिया है।जानकारी के अनुसार, 19 जुलाई को भोपाल के जगदीशपुर में आयोजित होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में UCC विधेयक के मसौदे पर प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। इसके बाद सरकार इसे मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश कर सकती है।
कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी होंगे पेश
UCC के अलावा सरकार इस सत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक और संशोधन भी पेश करने की तैयारी में है। इनमें कॉलोनाइजर एक्ट संशोधन, फायर सेफ्टी एक्ट, कोचिंग विनियमन विधेयक, प्रथम अनुपूरक बजट तथा सिंहस्थ मेला अधिनियम से जुड़े संशोधन प्रमुख हैं।सरकार का उद्देश्य इन विधेयकों के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और विभिन्न क्षेत्रों में नई नीतियों को लागू करना है।
कांग्रेस इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मानसून सत्र में सरकार को कई अहम जनहित के मुद्दों पर घेरेगी। कांग्रेस छतरपुर और पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासियों के विस्थापन, सिंगरौली में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, आदिवासी भूमि के गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी।
भाजपा भी करेगी जवाबी तैयारी
भाजपा विधायक दल की बैठक में सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति तैयार की जाएगी। पार्टी अपने विधायकों को सदन में विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने और सरकार के पक्ष को मजबूती से रखने के निर्देश दे सकती है।बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े मंत्रियों और विधायकों को भी संभावित प्रश्नों और चर्चाओं को लेकर तैयार किया जाएगा।
19 जुलाई को तय होगी दोनों दलों की रणनीति
19 जुलाई को होने वाली भाजपा और कांग्रेस विधायक दल की बैठकों में मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों दल अपने विधायकों को सदन की कार्यवाही के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति, संभावित बहसों और राजनीतिक मुद्दों को लेकर दिशा-निर्देश देंगे।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन बैठकों के बाद दोनों दलों के रुख और रणनीति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में तय होगा सदन का एजेंडा
20 जुलाई को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सदन के एजेंडे, विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के लिए समय और शासकीय कार्यों की रूपरेखा तय की जाएगी।इसके बाद मानसून सत्र की औपचारिक शुरुआत होगी।
हंगामेदार रहने के आसार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मानसून सत्र काफी गर्मागर्म रहने वाला है। एक ओर सरकार UCC समेत अपने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई, आदिवासी विस्थापन और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे।
ऐसे में मध्यप्रदेश विधानसभा का यह मानसून सत्र राज्य की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इस दौरान कई अहम राजनीतिक फैसले और तीखी बहसें देखने को मिल सकती हैं।