नई दिल्ली - इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर केंद्र सरकार की सख्ती के बाद मेटा (Meta) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने बताया कि उसने ऐसे कंटेंट और उससे जुड़े अकाउंट्स के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। मेटा का कहना है कि प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत विज्ञापन समीक्षा प्रणाली और सख्त प्रवर्तन नीति का इस्तेमाल किया जा रहा है।
केंद्र सरकार की सख्ती के बाद बढ़ी कार्रवाई
हाल ही में इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 'पेड' विज्ञापनों के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने मेटा को कड़े शब्दों में नोटिस जारी किया था। सरकार ने कंपनी से इस तरह के कंटेंट पर तत्काल कार्रवाई करने और प्लेटफॉर्म की निगरानी मजबूत करने को कहा था। सरकारी सख्ती के बाद मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर चल रहे संदिग्ध विज्ञापनों और उनसे जुड़े नेटवर्क की व्यापक जांच शुरू की।
मेटा ने क्या कहा?
मेटा ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट में स्वीकार किया कि भारत में हाल ही में सामने आए कुछ विज्ञापन उसकी नीतियों का उल्लंघन करते थे। कंपनी ने कहा कि वह इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और बच्चों के यौन शोषण या उससे जुड़े किसी भी प्रकार के कंटेंट के लिए उसके प्लेटफॉर्म पर कोई स्थान नहीं है। कंपनी के अनुसार, जांच के दौरान आपत्तिजनक विज्ञापनों को तुरंत हटाया गया, संबंधित अकाउंट्स को स्थायी रूप से बंद किया गया और उन वेबसाइटों (URL) को भी ब्लॉक कर दिया गया, जो नीति का उल्लंघन कर रही थीं।
AI टूल्स से हो रही निगरानी
मेटा ने बताया कि उसके अत्याधुनिक AI आधारित सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों, आपत्तिजनक विज्ञापनों और बच्चों के शोषण से जुड़े लिंक की पहचान करने में सक्षम हैं। ये टूल्स संभावित उल्लंघनों का स्वतः पता लगाकर उन्हें समीक्षा के लिए भेजते हैं, जिससे ऐसे कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई की जा सके। कंपनी का दावा है कि वह लगातार अपनी तकनीक को और बेहतर बना रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
छह महीने में हटाए 1.6 लाख अकाउंट
मेटा के मुताबिक, पिछले छह महीनों के दौरान भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले करीब 1.6 लाख अकाउंट हटाए गए हैं। कंपनी का कहना है कि यह कार्रवाई उसके नियमित सुरक्षा अभियान का हिस्सा है और आगे भी ऐसे अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सुरक्षित प्लेटफॉर्म बनाने पर जोर
मेटा ने कहा कि वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि ऑनलाइन सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सके। कंपनी ने दोहराया कि बच्चों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और किसी भी प्रकार के शोषण, अवैध गतिविधि या आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ उसकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा, विज्ञापनों की निगरानी और डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।