भारत में UPI ने डिजिटल लेन-देन को आसान, तेज और सुरक्षित बनाया है। अब नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) UPI को केवल पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि एक मजबूत क्रेडिट प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम कर रहा है। यह बदलाव देश की क्रेडिट आदतों को पूरी तरह बदल सकता है।
अब तक कहां थी सबसे बड़ी कमी
अब तक UPI और क्रेडिट कार्ड के बीच सबसे बड़ा अंतर ‘ग्रेस पीरियड’ का था। क्रेडिट कार्ड उपयोग करने पर उपभोक्ता को 30 से 45 दिनों तक बिना ब्याज भुगतान की सुविधा मिलती थी, जबकि UPI क्रेडिट लाइन में रकम खर्च करते ही ब्याज लागू हो जाता था। यही वजह थी कि बड़े खर्च के लिए लोग अब भी क्रेडिट कार्ड को प्राथमिकता देते थे।
NPCI का नया मास्टर प्लान क्या है
NPCI अब बैंकों के साथ मिलकर UPI क्रेडिट लाइन में भी ‘ब्याज-मुक्त अवधि’ जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ता UPI के जरिए उधार लेकर खरीदारी कर सकेगा और तय समय के भीतर भुगतान करने पर उसे कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं देना होगा। यह सुविधा UPI को क्रेडिट कार्ड के बराबर, बल्कि कई मामलों में उससे आगे ले जा सकती है।
क्रेडिट कार्ड कंपनियों की चिंता क्यों बढ़ी
UPI का यह नया रूप सीधे तौर पर क्रेडिट कार्ड बाजार को चुनौती देता है। मोबाइल से सीधे स्कैन कर भुगतान करने की सुविधा, कार्ड रखने या स्वाइप करने की जरूरत का खत्म होना और आसान एक्सेस इसे ज्यादा आकर्षक बनाता है। खासकर उन लोगों के लिए, जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है या जिनका सिबिल स्कोर कम होने के कारण कार्ड आवेदन खारिज हो जाता है, यह एक बड़ा विकल्प बन सकता है।
छोटे कर्ज की जरूरतों के लिए बड़ा समाधान
UPI क्रेडिट लाइन 2,000 से 5,000 रुपये जैसी छोटी जरूरतों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। अभी ऐसे छोटे खर्चों के लिए या तो महंगे पर्सनल लोन लेने पड़ते हैं या फिर ऊंचे ब्याज पर उधार। ब्याज-मुक्त अवधि के साथ UPI यह समस्या काफी हद तक खत्म कर सकता है।
बैंकों के बीच शुरू हो चुकी है प्रतिस्पर्धा
NPCI की इस दिशा में पहल के साथ ही बैंकों ने भी कदम बढ़ा दिए हैं। येस बैंक 45 दिनों तक ब्याज-मुक्त UPI क्रेडिट की सुविधा दे रहा है, जबकि सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक 30 दिनों का ब्याज-मुक्त समय प्रदान कर रहा है। इन पायलट प्रोजेक्ट्स से संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में बड़े बैंक भी इस दौड़ में शामिल होंगे।
डिजिटल क्रेडिट का भविष्य
अगर यह योजना बड़े स्तर पर लागू होती है, तो भारत में क्रेडिट कार्ड का एकाधिकार कमजोर पड़ सकता है। UPI का दायरा केवल भुगतान तक सीमित न रहकर डिजिटल क्रेडिट का सबसे सशक्त माध्यम बन सकता है। यह बदलाव न सिर्फ उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि देश की फिनटेक इकोसिस्टम को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
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