त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कारोबारियों के स्टॉक पर और सख्ती कर दी है। नए आदेश के तहत हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलर अब 15 दिनों से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी।सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ जाती है।
पहले 30 दिन की थी स्टॉक सीमा
सरकार ने जुलाई में ही चीनी डीलरों के लिए स्टॉक सीमा लागू की थी। उस समय डीलरों को 30 दिन से ज्यादा का स्टॉक रखने से रोक दिया गया था और कुल स्टॉक की मात्रा पर भी सीमा तय की गई थी। यह व्यवस्था 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक के लिए लागू की गई थी।
अब कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार ने स्टॉक रखने की अवधि को घटाकर 15 दिन कर दिया है। यानी कारोबारियों को चीनी की खरीद और बिक्री के बीच स्टॉक को लंबे समय तक रोककर रखने की गुंजाइश कम होगी।
चीनी की कीमतों में क्यों आया उछाल?
घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी सरकार की चिंता का प्रमुख कारण है। पिछले महीने भारतीय चीनी की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं।
त्योहारों में क्यों बढ़ जाती है चीनी की मांग?
अगस्त से नवंबर के बीच देश में कई बड़े त्योहार आते हैं। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाइयों के साथ-साथ बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है।इसी वजह से बड़े उपभोक्ता और खाद्य कंपनियां त्योहारों से पहले चीनी का स्टॉक बढ़ाने लगती हैं। सरकार को डर है कि बढ़ी हुई मांग के बीच कारोबारी बड़े पैमाने पर स्टॉक रोककर रखते हैं तो बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है और इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है।
सरकार आयात बढ़ाने पर भी कर रही विचार
चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार केवल स्टॉक सीमा तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक सीमित शुल्क-मुक्त आयात समेत कुछ अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों पर दबाव कम करना है।
गन्ने की फसल पर मौसम का असर
चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता की एक वजह गन्ने की फसल पर मौसम का प्रभाव भी है। अनियमित बारिश और कुछ क्षेत्रों में शुष्क मौसम ने गन्ने की पैदावार पर असर डाला है।ऐसे समय में अगर त्योहारों के कारण मांग तेजी से बढ़ती है, तो बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सरकार पहले से ही सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ा रही है।
चीनी निर्यात पर भी लग चुका है प्रतिबंध
घरेलू उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार पहले भी चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा चुकी है। सरकार ने कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा था और निर्यात रोक को 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी बताया गया था।इस कदम का उद्देश्य देश के भीतर पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना और घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखना रहा है।