नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027-28 के आम बजट को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने बजट सर्कुलर जारी करते हुए पूरी प्रक्रिया, समयसीमा और मंत्रालयों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश स्पष्ट कर दिए हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को अपने प्रस्तावित खर्च तथा उपलब्ध संसाधनों से संबंधित विस्तृत जानकारी तैयार करने को कहा गया है। बजट प्रक्रिया के शुरुआती चरण में वित्त वर्ष 2026-27 के संशोधित अनुमान और वित्त वर्ष 2027-28 के बजट अनुमान तैयार किए जाएंगे। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार आगामी वित्त वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों और योजनाओं के लिए संसाधनों की प्राथमिकता तय करेगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य बजट को अधिक यथार्थवादी, संसाधन आधारित और सरकार की घोषित विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना है।
12 अक्टूबर से शुरू होंगी प्री-बजट बैठकें
बजट निर्माण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार की प्री-बजट बैठकें 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगी। इससे पहले सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को आवश्यक जानकारी 6 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों में मंत्रालयों की ओर से प्रस्तावित खर्च, योजनाओं की वित्तीय जरूरत और आगामी वर्ष के लिए संसाधनों की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के बाद वित्त मंत्रालय उपलब्ध राजस्व और अन्य संसाधनों को ध्यान में रखते हुए आवंटन की रूपरेखा तैयार करेगा। प्री-बजट बैठकें इस लिहाज से महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि यहीं से अलग-अलग मंत्रालयों की मांगों और सरकार की व्यापक वित्तीय क्षमता के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। बजट की अंतिम तस्वीर तैयार होने से पहले इन बैठकों के जरिए प्राथमिकताओं को वित्तीय वास्तविकताओं के साथ मिलाने का प्रयास किया जाएगा।
संशोधित अनुमान और बजट अनुमान पर विशेष जोर
वित्त मंत्रालय ने मंत्रालयों और विभागों से वित्त वर्ष 2026-27 के संशोधित अनुमान तथा वित्त वर्ष 2027-28 के बजट अनुमान को यथार्थवादी और सटीक रखने को कहा है। संशोधित अनुमान मौजूदा वित्त वर्ष में वास्तविक खर्च की संभावित स्थिति को दर्शाते हैं, जबकि बजट अनुमान अगले वित्त वर्ष में सरकार के प्रस्तावित खर्च का आधार बनते हैं। ऐसे में इन आंकड़ों में अत्यधिक आशावादी अनुमान या अनावश्यक रूप से बढ़ी हुई मांग भविष्य में वित्तीय प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से विभागों को अपनी वास्तविक जरूरत, पहले से स्वीकृत योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की कोशिश है कि बजट में घोषित आवंटन वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों और वित्त वर्ष के दौरान बार-बार अतिरिक्त संसाधनों की मांग की स्थिति कम से कम बने।
विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ेगी बजट प्राथमिकता
आगामी बजट प्रक्रिया को सरकार के विकसित भारत @2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप रखने पर भी जोर दिया गया है। इसका अर्थ है कि मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रस्तुत खर्च प्रस्तावों में केवल तत्काल वित्तीय जरूरतों को ही नहीं, बल्कि सरकार की दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखना होगा। बुनियादी ढांचा, मानव संसाधन, रोजगार, तकनीकी क्षमता, सामाजिक क्षेत्र और आर्थिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए संसाधनों का आवंटन व्यापक नीति लक्ष्यों के अनुरूप किए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम प्राथमिकताएं बजट तैयार होने और संसद में पेश किए जाने की प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट होंगी। फिलहाल मंत्रालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके प्रस्ताव सरकार द्वारा पहले से मंजूर प्राथमिकताओं और वास्तविक संसाधन आवश्यकताओं के बीच संतुलन कायम करें।
अतिरिक्त संसाधनों की मांग सीमित रखने के निर्देश
बजट सर्कुलर में वित्त वर्ष के दौरान अतिरिक्त संसाधनों की मांग को न्यूनतम रखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका सीधा संबंध बजट अनुमानों की गुणवत्ता से है, क्योंकि यदि किसी मंत्रालय की प्रारंभिक मांग वास्तविक जरूरत से कम या गलत आकलन पर आधारित होती है तो वित्त वर्ष के बीच अतिरिक्त धन की मांग बढ़ सकती है। इससे सरकार की समग्र वित्तीय योजना पर दबाव पड़ सकता है और दूसरे क्षेत्रों के लिए निर्धारित संसाधनों के पुनर्विन्यास की जरूरत पैदा हो सकती है। इसलिए मंत्रालयों से कहा गया है कि वे अपने खर्च का आकलन सावधानीपूर्वक करें और बजट प्रस्ताव तैयार करते समय संभावित जरूरतों को पहले ही ध्यान में रखें। इसके साथ ही प्रस्तावित आवंटनों के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।
पहले से चल रही योजनाओं के खर्च का भी देना होगा हिसाब
बजट प्रक्रिया में केवल नई योजनाओं और नए खर्च प्रस्तावों पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि पहले से चल रही योजनाओं की वित्तीय स्थिति को भी महत्व दिया जाएगा। बजट सर्कुलर के अनुसार मौजूदा योजनाओं के लिए स्वीकृत व्यय योजनाओं का उपलब्ध होना आवश्यक होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन योजनाओं पर पहले से सरकारी धन खर्च हो रहा है, उनके लिए अगले वित्त वर्ष में प्रस्तावित आवंटन वास्तविक जरूरतों और पूर्व स्वीकृत वित्तीय ढांचे से जुड़े हों। इससे योजनाओं के खर्च की निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ अनावश्यक या दोहराव वाले प्रस्तावों की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है। मंत्रालयों को अपने पुराने कार्यक्रमों की प्रगति और भविष्य की वित्तीय जरूरतों का आकलन करते हुए बजट प्रस्ताव तैयार करने होंगे।
यूबीआईएस के जरिए तैयार होंगी अनुदान की विस्तृत मांगें
बजट निर्माण की पूरी प्रक्रिया में यूनियन बजट इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी यूबीआईएस की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। मंत्रालय और विभाग इसी प्रणाली के माध्यम से अनुदान की विस्तृत मांगें तैयार करेंगे। अनुदान की विस्तृत मांग बजट प्रक्रिया का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है, जिसमें मंत्रालयों और विभागों के प्रस्तावित खर्च का विस्तृत विवरण शामिल रहता है। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से इस जानकारी को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने से बजट प्रस्तावों के संकलन, समीक्षा और वित्तीय विश्लेषण की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा सकता है। मंत्रालयों के वित्तीय सलाहकारों को यूबीआईएस में जानकारी दर्ज करते समय निर्धारित प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बजट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में आंकड़ों की शुद्धता और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिखाई देता है।
बजट से जुड़ी सूचनाओं की गोपनीयता पर भी सख्ती
बजट निर्माण प्रक्रिया में गोपनीयता को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि बजट से जुड़ी कई सूचनाएं अंतिम घोषणा से पहले सार्वजनिक नहीं की जातीं। वित्त मंत्रालय ने वित्तीय सलाहकारों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यूबीआईएस में दर्ज की जाने वाली बजट संबंधी जानकारी केवल निर्धारित सुरक्षित प्रणालियों के माध्यम से ही संभाली जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य संवेदनशील वित्तीय सूचनाओं की अनधिकृत पहुंच या समय से पहले उनके सार्वजनिक होने की संभावना को कम करना है। बजट के प्रस्ताव तैयार करने से लेकर अंतिम दस्तावेज तैयार होने तक बड़ी संख्या में अधिकारी और विभाग प्रक्रिया में शामिल होते हैं, इसलिए सूचना सुरक्षा को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण हो जाता है। सरकार की ओर से गोपनीयता पर दिया गया जोर इसी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
अब मंत्रालयों की मांगों और सरकार की क्षमता के बीच बनेगा संतुलन
बजट सर्कुलर जारी होने के साथ अब विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सामने अपनी वित्तीय जरूरतों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज होगी। उन्हें एक ओर मौजूदा योजनाओं और प्रतिबद्ध खर्चों का ध्यान रखना होगा, वहीं दूसरी ओर नई प्राथमिकताओं के लिए आवश्यक संसाधनों का आकलन भी करना होगा। इसके बाद प्री-बजट बैठकों में इन मांगों पर वित्त मंत्रालय के साथ विस्तृत चर्चा होगी और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर आवंटन को अंतिम रूप देने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि विकास और कल्याण से जुड़ी प्राथमिकताओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन भी कायम रखा जाए। अक्टूबर से शुरू होने वाली बैठकें इसी व्यापक संतुलन को तय करने की दिशा में बजट 2027-28 की शुरुआती महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगी।