नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत के लिए अमेरिका से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर एक बार फिर आर्थिक शुलक (टैरिफ) का हंटर चलाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के करीब 60 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त सीमा शुल्क (US Tariff) लगाने की सिफारिश की है। नई दिल्ली ने वाशिंगटन के इस कदम पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
इस बीच, भारत सरकार के केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) ने बेहद नपी-तुली और संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ अभी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत का दौर चल रहा है और कुछ भी अंतिम नहीं हुआ है।
अमेरिकी कानून की 'धारा 301' को बनाया हथियार
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने यह नया प्रस्ताव अपने घरेलू व्यापार कानून की धारा 301 (Section 301) को आधार बनाकर तैयार किया है। व्हाइट हाउस का दावा है कि यह कदम वैश्विक स्तर पर 'जबरन श्रम' (Forced Labor) के जरिए तैयार होने वाले उत्पादों के आयात को प्रतिबंधित करने के लिए उठाया जा रहा है।
अमेरिकी प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों ने जबरन श्रम पर आधारित आयातों पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लागू किया है, उन पर 10 प्रतिशत और जिन्होंने इस संबंध में कोई कड़ा कानून या प्रतिबंध लागू नहीं किया है, उन पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। इस सूची में भारत के साथ-साथ चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई प्रमुख देश शामिल हैं।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय का आधिकारिक बयान
अमेरिकी प्रशासन के इस प्रस्ताव पर भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा: "भारत इस समय धारा 301 को लागू किए जाने के विषय पर अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच 2 फरवरी 2026 को घोषित और 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित संयुक्त बयान के अनुसार द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Deal) को अंतिम रूप देने पर काम जारी है।"
केंद्र सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि पूर्व में 'धारा 232' (Section 232) के तहत जिन उत्पादों पर पहले से शुलक लागू था, उनके अलावा कुछ अन्य विशिष्ट उत्पादों को इस नए प्रस्तावित शुलक ढांचे से बाहर रखने का अनुरोध किया गया है। भारत के लिए राहत की बात यह है कि यह प्रस्ताव अभी केवल चर्चा और समीक्षा के स्तर पर है। अमेरिकी प्रशासन इस पर आम जनता और वैश्विक प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगा।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की बढ़ी चिंता
भले ही यह प्रस्ताव अभी अंतिम न हो, लेकिन मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध और वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधाओं के बीच ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारतीय निर्यातकों और सरकार के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गया है। यदि यह शुलक अंतिम रूप से लागू होता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है।