रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध मादक पदार्थ अफीम की खेती को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश के 33 जिलों से कलेक्टरों द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट राज्य शासन तक पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल तीन जिलों में कुल 6 स्थानों पर अफीम की खेती की पुष्टि हुई है, जबकि 30 जिलों के कलेक्टरों ने अपने यहां अफीम की खेती नहीं होने का प्रमाण पत्र सौंपा है।
दरअसल, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने प्रदेशभर में व्यापक सर्वे अभियान चलाया था, जिसके आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले ही कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद सीएम ने स्पष्ट कहा है कि चाहे कितना भी बड़ा रसूखदार क्यों न हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और प्रदेश में नशे का अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि बीते दिनों दुर्ग, बलरामपुर और रायगढ़ जिलों में अफीम की अवैध खेती के मामले सामने आए थे। दुर्ग में भाजपा नेता सहित 9 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि बलरामपुर में 11 आरोपियों को पकड़ा गया। रायगढ़ जिले के लैलूंगा और तमनार क्षेत्र में भी अफीम की खेती का खुलासा हुआ, जहां स्थानीय लोगों के साथ बाहरी राज्यों से आए लोग भी इस अवैध गतिविधि में शामिल पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर शासकीय भूमि, यहां तक कि परियोजना से जुड़ी जमीन पर भी अफीम की खेती की जा रही थी। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है और अन्य संभावित स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है।
वहीं, इस पूरे मामले पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया ने कलेक्टरों की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए सरकार पर लीपापोती का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रदेश में लगातार अफीम के मामले सामने आ रहे हैं, बावजूद इसके सरकार सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती का मुद्दा अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा सियासी मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में और भी घमासान देखने को मिल सकता है।