मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर लंबित मामलों में नया मोड़ आया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब इस मामले पर तेजी से सुनवाई की जाएगी। 16 अप्रैल से मामले की अंतिम सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने कहा कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा और शीघ्र आदेश पारित किए जाएंगे।
सभी पक्षों को 2 अप्रैल तक समय
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को 2 अप्रैल तक अपने जवाब कोर्ट में प्रस्तुत करने का समय दिया है। रजिस्ट्रार को निर्देश दिए गए हैं कि सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर हुए लंबित मामले भी उसी दिन लिस्ट किए जाएं। सभी पक्षों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय मिलेगा, जिसके बाद 16 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले के निपटान के लिए 90 दिन की समयसीमा तय की है।
छह वर्षों से लंबित मामला, अब समय बर्बाद नहीं होगा
सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला पिछले छह वर्षों से लंबित है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद समय व्यर्थ हो गया। कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि अब सुनवाई तय समयसीमा में पूरी होगी। सुनवाई के दौरान यह भी ध्यान रखा जाएगा कि बार-बार हस्तक्षेप आवेदन दायर कर मामले को न टाला जाए।
लीड केस पर बहस और विलंब करने वाली याचिकाओं पर सख्ती
वरिष्ठ अधिवक्ता संघी ने कहा कि आशिता दुबे और अन्य की याचिका इस मामले में मुख्य है। वहीं, OBC पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने तर्क दिया कि इसे लीड केस नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि अंतिम सुनवाई में सभी पक्षों को सुना जाएगा, लेकिन केवल विलंब करने के उद्देश्य से दायर याचिकाओं को नहीं सुना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मिलने के बाद यह मामला हाईकोर्ट में अंतिम निर्णय के लिए लौटा है और अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इसकी वैधानिकता पर अंतिम आदेश देगा।