इंदौर के राजवाड़ा में ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। रामनवमी के अवसर पर होलकर राजवंश की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए यशवंतराव होलकर तृतीय को राजवंश का 16वां उत्तराधिकारी घोषित किया गया। यह परंपरा 64 वर्ष बाद निभाई गई।
दरबार सजा, परंपरागत रस्में निभाईं
राजसी ठाठ-बाट के साथ आयोजित इस समारोह में सरदारों, दीवानों, राजगुरु और ठिकानदारों की मौजूदगी में दरबार सजा। परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार यशवंतराव होलकर को पगड़ी पहनाई गई और यशवंतराव होलकर (द्वितीय) की तलवार भेंट की गई। साथ ही उन्हें ‘बहादुर’ की उपाधि भी प्रदान की गई।
उषाराजे की इच्छा के अनुसार हुआ उत्तराधिकारी का चयन
यह घोषणा होलकर राजवंश की उत्तराधिकारी महारानी उषाराजे होलकर की इच्छा के अनुसार की गई। उन्होंने अपने छोटे भाई शिवाजीराव होलकर द्वितीय (रिचर्ड होलकर) के पुत्र यशवंतराव को उत्तराधिकारी नियुक्त किया।
ग्रहशांति व श्रीराम नवमी पूजन
समारोह की अध्यक्षता राजवंश के राजगुरु डॉ. विजय विश्वनाथ राजोपाध्याय ने की। इस अवसर पर ग्रहशांति एवं श्रीराम नवमी का विधिवत पूजन कराया गया। यशवंतराव होलकर ने पहले कुलदेवता मल्हारी मार्तंड के दर्शन किए और पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को पान-सुपारी अर्पित की।
सेवा और विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
उत्तराधिकारी घोषित होने के बाद यशवंतराव होलकर तृतीय ने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि— होलकर सांस्कृतिक केंद्र के माध्यम से विरासत संरक्षण। रेवा सोसाइटी और वुमनवीव के जरिए हथकरघा व कारीगरों का पुनरुत्थान। खासगी ट्रस्ट के माध्यम से देवी अहिल्याबाई होलकर की सेवा व धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
1731 में हुई थी राजवंश की स्थापना
होलकर राजवंश की स्थापना ने 1731 में की थी। तब से यह राजवंश सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन करता आ रहा है। अब यशवंतराव होलकर तृतीय के रूप में राजवंश को 16वां उत्तराधिकारी मिला है।
आज भी जीवित हैं ये परंपराएं
- राजवाड़े पर शासकीय होली
- दशहरा मैदान में शमी पूजन
- गणेश चतुर्थी पर राजसी पालकी
- महेश्वर में दैनिक धार्मिक अनुष्ठान
- जैसी परंपराओं का नियमित रूप से पालन करता है।