मुंबई: बॉलीवुड के सुपरस्टार रणवीर सिंह और मशहूर निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर की आने वाली फिल्म 'डॉन 3' को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ समय से चल रही यह खींचतान अब पूरी तरह से कानूनी लड़ाई में बदल चुकी है। अपने खिलाफ 'फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज' द्वारा जारी किए गए प्रतिबंध (बैन) के आदेश को चुनौती देते हुए अभिनेता रणवीर सिंह अब खुद अदालत पहुंच गए हैं।
बता दें कि पिछले हफ्ते ही फेडरेशन ने रणवीर सिंह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म इंडस्ट्री में उनके साथ काम न करने (नॉन-कोऑपरेशन) का फरमान जारी किया था, जिसका अब अभिनेता ने करारा जवाब दिया है।
क्या है पूरा विवाद? फरहान ने लगाया धोखे का आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ में फिल्म 'डॉन 3' के निर्माण को बीच में ही रोकना है। निर्माता फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी (एक्सेल एंटरटेनमेंट) का आरोप है कि रणवीर सिंह ने फिल्म के लिए एडवांस टोकन मनी (पारिश्रमिक) ले ली थी, लेकिन बाद में वह इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गए। निर्माताओं का दावा है कि रणवीर के इस अचानक लिए गए फैसले के कारण प्रोडक्शन हाउस को भारी वित्तीय और व्यावसायिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसी के चलते फरवरी महीने में एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह से मोटी रकम के मुआवजे की मांग की थी।
10 करोड़ कैश और 25 करोड़ के डिस्काउंट का ऑफर हुआ था रिजेक्ट
इस विवाद को सुलझाने के लिए 'प्रड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया' की एक बैठक भी बुलाई गई थी, जहाँ रणवीर सिंह ने साफ कह दिया था कि फिल्म रुकने से हुए नुकसान की भरपाई करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। हालांकि, बाद में रणवीर की पीआर और लीगल टीम ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक्सेल एंटरटेनमेंट के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा था।
रणवीर की टीम ने एडवांस के तौर पर 10 करोड़ रुपये वापस करने का ऑफर दिया था। साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा था कि अगर एक्सेल एंटरटेनमेंट भविष्य में 'डॉन 3' के अलावा रणवीर के साथ कोई दूसरी फिल्म बनाता है, तो वह अपनी फीस में 25 करोड़ रुपये की भारी छूट (डिस्कउंट) देंगे। लेकिन फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया और साफ कह दिया कि वे भविष्य में रणवीर के साथ कभी काम नहीं करेंगे।
फेडरेशन का यू-टर्न और कोर्ट में चुनौती
रणवीर सिंह से पहले इस मामले में दिग्गज और वरिष्ठ निर्माता टीपी अग्रवाल ने बॉम्बे सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उन्होंने फिल्म बॉडी और इम्पा (IMPPA) को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि किसी भी व्यावसायिक संगठन या संस्था के पास यह कानूनी अधिकार नहीं है कि वह किसी सेलिब्रिटी को अचानक इंडस्ट्री में 'बैन' कर दे या दूसरों को उसके साथ काम करने से रोके। ऐसा करना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
चौतरफा दबाव के बीच फेडरेशन ने भी अपने पैर पीछे खींचते हुए यह स्पष्टीकरण दिया था कि उन्होंने रणवीर पर 'बैन' नहीं लगाया है, बल्कि सिर्फ 'नॉन-कोऑपरेशन' (असहयोग) की बात कही है। बहरहाल, अब खुद रणवीर सिंह ने इस मामले को कोर्ट में घसीट लिया है, जिससे आने वाले दिनों में बॉलीवुड के इस सबसे बड़े विवाद का नतीजा अदालत की बेंच से तय होगा।