देशभर में बढ़ती गर्मी और लू के बीच हीटस्ट्रोक के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान के कारण शरीर का तापमान संतुलन बिगड़ जाता है, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग इसके कारण, बचाव और प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूक रहें।
हीटस्ट्रोक क्यों होता है?
अत्यधिक गर्मी में लंबे समय तक रहने से शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक हो सकता है। जब शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, तब हीटस्ट्रोक होता है। पसीना बंद होना, डिहाइड्रेशन और सीधे धूप के संपर्क में रहना इसके प्रमुख कारण हैं।
कैसे रहें सुरक्षित?
तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच। हल्के और ढीले कपड़े पहनें तथा शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं। बाहर जाते समय छाता, टोपी या गमछे का उपयोग करें और समय-समय पर ठंडी जगह पर आराम करें।
तुरंत क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को चक्कर, सिरदर्द, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत उसे ठंडी जगह पर ले जाएं। शरीर को ठंडा करने के लिए ठंडे पानी से कपड़ा भिगोकर शरीर पर रखें और पानी पिलाएं। स्थिति गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
सावधानी ही सुरक्षा है
हीटस्ट्रोक जानलेवा साबित हो सकता है, लेकिन सही समय पर सावधानी और सही कदम उठाकर इससे बचा जा सकता है। गर्मी के मौसम में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।