हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन को दुनिया भर में सबसे खतरनाक जीवनशैली संबंधी बीमारियों में गिना जाता है। इसे “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि अधिकांश मामलों में इसके शुरुआती लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है, लेकिन भीतर ही भीतर यह बीमारी दिल, दिमाग, किडनी और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती रहती है। कई बार लोगों को तब इसकी जानकारी मिलती है, जब हार्ट अटैक, स्ट्रोक या कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थिति सामने आ जाती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता पर विशेष जोर देते हैं।
दिल और धमनियों पर बढ़ता है लगातार दबाव
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर धमनियों को सख्त और कमजोर बना सकता है। इससे दिल को शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए अधिक दबाव लगाना पड़ता है। लगातार बढ़ता यह दबाव हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है और हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा मस्तिष्क में रक्त प्रवाह प्रभावित होने से स्ट्रोक और किडनी की कार्यप्रणाली पर असर पड़ने से गुर्दों से जुड़ी गंभीर बीमारियां भी विकसित हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय रहते ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर लिया जाए तो इन खतरों को काफी हद तक टाला जा सकता है।
कितना ब्लड प्रेशर माना जाता है सामान्य?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य स्थिति में ब्लड प्रेशर 120 mmHg से नीचे होना बेहतर माना जाता है। यदि यह लगातार 130 mmHg या उससे ऊपर रहने लगे, तो व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आ सकता है। हालांकि उम्र, शारीरिक स्थिति और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर यह सीमा अलग-अलग हो सकती है। इसलिए डॉक्टरों की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच करवाना जरूरी माना जाता है। नियमित मॉनिटरिंग से बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान संभव हो पाती है।
जीवनशैली में बदलाव से मिल सकता है बड़ा लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपरटेंशन का स्थायी इलाज भले न हो, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जीवनशैली में सुधार की होती है। खाने में नमक की मात्रा कम करना, संतुलित और पौष्टिक आहार लेना तथा जंक फूड से दूरी बनाना बेहद जरूरी माना जाता है। इसके अलावा नियमित व्यायाम, योग और शारीरिक गतिविधियां रक्तचाप को नियंत्रित रखने में काफी मददगार साबित होती हैं। तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया जाता है।
धूम्रपान और शराब बढ़ा सकते हैं खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन हाई ब्लड प्रेशर को तेजी से बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। तंबाकू और निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित करते हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी तरह अत्यधिक शराब सेवन भी हृदय और किडनी दोनों को प्रभावित करता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति हाई बीपी से जूझ रहा है, तो इन आदतों से दूरी बनाना बेहद जरूरी माना जाता है।
नियमित जांच और दवाइयों में लापरवाही न करें
डॉक्टरों के अनुसार कई लोग दवा शुरू होने के बाद कुछ समय में लापरवाही बरतने लगते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर नियंत्रित दिखने पर भी नियमित दवाइयों और जांच को जारी रखना जरूरी है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक सही इलाज, नियमित मॉनिटरिंग और हेल्दी आदतों के जरिए हाई ब्लड प्रेशर के मरीज सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इसलिए जागरूकता, अनुशासन और समय पर उपचार ही इस “साइलेंट किलर” से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।