मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। ईरान, इजरायल और United States के बीच हमलों और जवाबी हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए हैं। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत की खबरों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
हिजबुल्लाह खुलकर आया मैदान में
ईरान पर हमलों के बाद लेबनान का संगठन हिजबुल्लाह अब खुलकर इस संघर्ष में शामिल हो गया है। माना जा रहा है कि यह समूह ईरान के समर्थन में इजरायल के खिलाफ सक्रिय हुआ है। इजरायल की सेना (IDF) ने दावा किया है कि लेबनान की ओर से हाइफा शहर पर छह रॉकेट दागे गए। हालांकि, इजरायल ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इन रॉकेटों को इंटरसेप्ट कर लिया।
क्यों चुप था हिजबुल्लाह?
अब सवाल उठ रहे हैं कि अब तक हिजबुल्लाह ने खुलकर हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय रणनीति और समय का इंतजार इसकी वजह हो सकती है। हिजबुल्लाह को लंबे समय से ईरान का प्रमुख सहयोगी माना जाता है। 1980 के दशक से यह समूह ईरान समर्थित ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ का हिस्सा रहा है और उसे वित्तीय, सैन्य व रणनीतिक समर्थन मिलता रहा है।
बढ़ सकता है संघर्ष
हिजबुल्लाह की सक्रिय भागीदारी से यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है। अब इजरायल को न सिर्फ ईरान बल्कि लेबनान सीमा से भी हमलों की आशंका रहेगी। मौजूदा हालात ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं।
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