पैक्स सिलिका एक वैश्विक गठबंधन है जिसका उद्देश्य एआई, दुर्लभ खनिजों और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में सुरक्षित और विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करना है। भारत के इसमें शामिल होने से यह संकेत मिलता है कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच विश्वास की नींव पहले से अधिक मजबूत हो चुकी है। ट्रेड डील को लेकर चली असमंजसता के बाद यह साझेदारी दोनों देशों के बीच आर्थिक और वैज्ञानिक सहयोग का नया अध्याय खोलती है।
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीतिक कोशिश
दुनिया के अधिकांश देश दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, शोधन और खनन के लिए चीन पर निर्भर रहे हैं, जिससे रणनीतिक जोखिम बढ़ा है। पैक्स सिलिका का मुख्य उद्देश्य इसी निर्भरता को कम करना और लोकतांत्रिक देशों के लिए एक वैकल्पिक, मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है। भारत का इसमें शामिल होना इस दिशा में एक निर्णायक कदम है जो देश की वैश्विक तकनीकी स्थिति को और मजबूत करेगा।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार भारत की भूमिका
अमेरिका के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने भारत की भागीदारी को 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया। उनका मानना है कि पैक्स सिलिका लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शी विनिर्माण और साझा तकनीकी प्रगति की दिशा में एक बड़ा मंच है। यह गठबंधन न केवल आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाता है बल्कि आने वाले समय में एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नई प्रतिस्पर्धा भी उत्पन्न करेगा।
पैक्स सिलिका की स्थापना और भारत की सक्रिय भागीदारी
पैक्स सिलिका की शुरुआत दिसंबर 2025 में वाशिंगटन में हुई थी। इसकी पहली बैठक में ट्रेजरी सेक्रेट्री की अगुवाई में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया था। इसके बाद अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा बुलाई गई दूसरी बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हुए। इससे स्पष्ट होता है कि भारत इस पहल को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में देख रहा है और लंबे समय तक इसके साथ जुड़ा रहेगा।
सप्लाई चेन सुधार से भारत को मिलने वाले आर्थिक लाभ
भारत पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और तकनीकी विनिर्माण में तेजी से उभर रहा है। अश्विनी वैष्णव के अनुसार भारत में दस सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित हो चुके हैं और कई अन्य निर्माणाधीन हैं। जल्द ही पहला सेमीकंडक्टर प्लांट वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेगा। पैक्स सिलिका भारत के इन प्रयासों को वैश्विक बाजार से जोड़कर एक मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम तैयार करेगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, निवेश, तकनीकी शोध और रोजगार के अवसरों में तेजी से वृद्धि होगी।
Comments (0)