पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित किए जाने का असर अब पाकिस्तान में साफ दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक उसे कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। इसी बीच पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों में तेजी आने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे सीमा पर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर सैन्य संसाधनों की तैनाती शुरू कर दी है। वहीं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान ने भी दोनों देशों के बीच तनाव को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
सिंधु जल संधि पर बढ़ा विवाद, पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत का स्पष्ट कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल करने पर विचार नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अब तक उसे कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। ऐसे में इस्लामाबाद की चिंता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
LoC पर बढ़ाई गई सैन्य गतिविधियां
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है।
चीन से मिल रही सैन्य ताकत
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान और चीन के रक्षा सहयोग को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि चीन पाकिस्तान को आधुनिक लड़ाकू विमानों और सैन्य तकनीक से मदद दे रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान को अत्याधुनिक जे-सीरीज लड़ाकू विमान मिलने की प्रक्रिया जारी है।
तुर्किये भी बढ़ा रहा सहयोग
रिपोर्ट्स के अनुसार तुर्किये और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। दोनों देशों के बीच ड्रोन तकनीक और समुद्री सुरक्षा परियोजनाओं पर काम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
रक्षा मंत्री के बयान से बढ़ी चर्चा
कुछ दिन पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि यदि देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो पाकिस्तान कठोर कदम उठा सकता है। हालांकि उनके बयान को लेकर पाकिस्तान के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जल विवाद को लेकर पाकिस्तान सरकार पर घरेलू दबाव भी बढ़ रहा है।
क्या है सिंधु जल संधि?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को हुई थी। यह समझौता विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था और इसे दुनिया की सबसे सफल जल संधियों में से एक माना जाता है।
सिंधु नदी प्रणाली में कुल छह प्रमुख नदियां शामिल हैं:
सिंधु
झेलम
चिनाब
रावी
ब्यास
सतलुज
इन नदियों के जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच यह ऐतिहासिक समझौता हुआ था।
आगे क्या?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव अभी भी बना हुआ है। एक ओर भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में इस मुद्दे का असर दोनों देशों के कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।