मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच चुका है। इसी बीच ईरान की स्पेशल फोर्स आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने ‘ऑपरेशनल ट्रुथ प्रॉमिस 4’ के तहत इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर पर अचानक मिसाइल हमला किया है।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि इजरायल के एयरफोर्स कमांडर के घर को भी निशाना बनाया गया है। संगठन ने नेतन्याहू को “अपराधी प्रधानमंत्री” बताते हुए यह दावा जारी किया है।
सरकारी कॉम्प्लेक्स पर फोकस्ड अटैक—आईआरजीसी
आईआरजीसी ने कहा कि उसके “सफल मिसाइल हमलों” ने जायोनी शासन के सरकारी कॉम्प्लेक्स को केंद्र में रखा। संगठन का कहना है कि इन हमलों की विस्तृत जानकारी बाद में सार्वजनिक की जाएगी।
ईरान का मीडिया लगातार दावा कर रहा है कि यह जवाबी कार्रवाई खामेनेई की मौत का बदला लेने की दिशा में एक प्रमुख कदम है।
ईरान में बेकाबू होती आईआरजीसी?
आईआरजीसी ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाइयों में से एक है, जिसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद बनाया गया था। हाल ही में हुए इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद स्थितियां और अस्थिर हो गई हैं।
ऐसा कहा जा रहा है कि अब आईआरजीसी अपनी रणनीतियां खुद तय कर रही है। इसका अंदाजा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के उस बयान से लगाया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि ओमान पर हमला करना उनकी पसंद नहीं थी।
तीन दिन से जारी है खूनी संघर्ष
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था। पहले ही दिन इजरायली सेना ने तेहरान में स्थित खामेनेई के कंपाउंड पर बमबारी की थी, जिसमें उनकी मौत हो गई।
रविवार रात ईरानी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि भी कर दी। इसके बाद से ही हालात और अधिक बदतर हो गए हैं।
दोनों ओर से लगातार हमले, बढ़ता खतरा
ईरान लगातार इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रहा है। इजरायल का दावा है कि उसके जवाबी हमलों में खामेनेई समेत 40 शीर्ष कमांडर मारे गए हैं।
तीन दिन से जारी यह संघर्ष अब बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध में बदलता जा रहा है, जिसकी आंच पूरी दुनिया तक पहुंचने का खतरा बढ़ चुका है।
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