पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है और समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो भारत की करीब 50% तेल सप्लाई पर संकट गहरा सकता है। इसके साथ ही शेयर बाजार में गिरावट और सोना-चांदी की कीमतों में उछाल की आशंका भी बढ़ गई है।
होर्मुज स्ट्रेट: भारत के लिए लाइफलाइन
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों से आयात करता है, जो इसी रास्ते से होकर आता है। भारत को हर महीने मिलने वाली करीब 50% तेल सप्लाई इसी रूट पर निर्भर है। अगर यह मार्ग बाधित होता है तो सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ेगा। अमेरिका की ऊर्जा एजेंसी EIA के मुताबिक, दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम इसी मार्ग से गुजरता है।
10% नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट भी जोखिम में
तेल के अलावा भारत का व्यापार भी प्रभावित हो सकता है। अनुमान है कि भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से ज्यादा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है। इसमें बासमती चावल,चाय, मसाले,ताजे फल और सब्जियां इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद शामिल हैं,पश्चिम एशिया के GCC देशों को होने वाला अधिकांश निर्यात इसी समुद्री मार्ग से होता है। रूट बंद होने या शिपिंग महंगी होने से भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है।
शेयर बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका
कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए संवेदनशील कारक हैं। अगर ब्रेंट क्रूड 80–85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाता है, तो बाजार में भारी बिकवाली देखी जा सकती है। एविएशन, लॉजिस्टिक्स, पेंट और टायर सेक्टर पर सीधा असर पड़ेगा,मार्जिन में गिरावट की संभावना है,विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली तेज हो सकती है भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर बाजार में अस्थिरता स्वाभाविक है।
सोना-चांदी बन सकते हैं सुरक्षित ठिकाना
जब वैश्विक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोना और चांदी की मांग बढ़ती है। 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के लिए लगभग ₹1.59 लाख तक पहुंच चुका है। चांदी की कीमत ₹2.66 लाख प्रति किलो के आसपास है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध की वजह से कीमती धातुओं की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
महंगाई का बढ़ सकता है दबाव
अगर क्रूड ऑयल महंगा होता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना खत्म हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ेगी,फल-सब्जियों और रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ेंगी,खुदरा महंगाई दर (रिटेल इन्फ्लेशन) पर दबाव बढ़ेगा
क्या है आगे की स्थिति?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल स्थिति “वेट एंड वॉच” की है। अगर सैन्य कार्रवाई सीमित रहती है तो बाजार जल्द संभल सकता है। लेकिन अगर तेल रिफाइनरियों या होर्मुज रूट को निशाना बनाया गया, तो इसका असर लंबी अवधि तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट: एक नजर में
लंबाई: करीब 167 किमी
सबसे संकरा हिस्सा: लगभग 33 किमी
रोजाना 1.7–2 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही
एशियाई देशों को 80% से ज्यादा निर्यात
स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मसला नहीं है, बल्कि इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
Comments (0)