पुरी - ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में करीब 48 साल बाद रत्न भंडार (खजाने) को खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित घटना पर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। मंदिर के इस रहस्यमयी खजाने में सदियों से संचित सोने-चांदी और बहुमूल्य रत्नों के भंडार के बारे में जानने की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।
पहले चरण में ‘चलित खजाना’की गिनती की गई
रत्न भंडार की गणना को तीन चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में ‘चलित खजाना’ (मूवेबल ट्रेजरी) की गिनती की गई, जिसमें भगवान के दैनिक श्रृंगार में उपयोग होने वाले आभूषण रखे जाते हैं। दूसरे चरण में ‘बाहरी खजाना’ शामिल है, जिसमें त्योहारों और विशेष अवसरों पर उपयोग होने वाले आभूषण सुरक्षित रखे जाते हैं। अब सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण—आंतरिक रत्न भंडार की गिनती—शुरू हो चुकी है, जहां सबसे दुर्लभ और बेशकीमती आभूषण संरक्षित माने जाते हैं।
13 अप्रैल से आंतरिक भंडार की गणना का कार्य प्रारंभ हुआ
13 अप्रैल से आंतरिक भंडार की गणना का कार्य प्रारंभ हुआ है, जो 16 से 18 अप्रैल के बीच भी जारी रहेगा। इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। 3D मैपिंग, हाई-रेजोल्यूशन वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के जरिए हर वस्तु का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की विसंगति से बचा जा सके।
अनमोल आभूषण और दुर्लभ रत्न मौजूद हैं
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। रत्न भंडार के भीतर केवल अधिकृत समिति के सदस्यों को ही प्रवेश की अनुमति है। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन इस कार्य को अत्यंत सावधानी और गोपनीयता के साथ संपन्न कर रहे हैं, क्योंकि आंतरिक भंडार को अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए अर्पित किए गए अनमोल आभूषण और दुर्लभ रत्न मौजूद हैं।
आभूषणों को अलग-अलग कालखंड के हैं
इन आभूषणों को अलग-अलग कालखंड में राजाओं, महाराजाओं और श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किया गया था। सदियों से यह रत्न भंडार आस्था, इतिहास और रहस्य का प्रतीक बना हुआ है। पुरी का जगन्नाथ धाम देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है और यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह स्थल गहरी आस्था का केंद्र है। ऐसे में रत्न भंडार के खुलने और उसमें मौजूद खजाने की गणना को लेकर लोगों में खासा उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिल रही है। अब सभी को उस पल का इंतजार है, जब इस ऐतिहासिक खजाने से जुड़े रहस्य पूरी तरह दुनिया के सामने आएंगे।