नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच भारत ने तेजी से कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस्लामाबाद में हुई मध्यस्थता वार्ता के विफल होने के बाद अब मोदी सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूएई, सऊदी अरब और कतर के साथ नया तेल प्लान तैयार करने की दिशा में काम तेज कर दिया है।
इस्लामाबाद वार्ता फेल, भारत ने बदली रणनीति
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति बहाली के प्रयास नाकाम रहने के बाद क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई है। ईरान-अमेरिका तनाव के चलते लगभग 40 दिनों तक वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित रही, जिससे भारत समेत कई देशों में तेल की कमी का खतरा पैदा हो गया। हालांकि हालिया सीजफायर से बने अवसर का फायदा उठाते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा कूटनीति को और आक्रामक बनाया है।
यूएई, सऊदी और कतर के साथ नई तेल डिप्लोमेसी
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात का दौरा कर वहां के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से मुलाकात की। इसके साथ ही भारत ने सऊदी अरब और कतर से भी संपर्क बढ़ाया है ताकि कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई बिना बाधा जारी रह सके। सरकार का फोकस वैकल्पिक सप्लाई चैन तैयार करने और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते करने पर है।
हॉर्मुज संकट से निपटने की तैयारी
भारत की रणनीति का अहम हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित अवरोध से बचाव भी है। सरकार ऐसे विकल्प तलाश रही है जिससे तेल और गैस की आपूर्ति बिना इस संवेदनशील मार्ग पर निर्भर हुए जारी रह सके। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल को रेड सी तक पहुंचाने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे हॉर्मुज पर निर्भरता कम होगी।
IMEC कॉरिडोर और वैकल्पिक रूट पर फोकस
भारत मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) को भी एक बड़े विकल्प के रूप में देख रहा है। इस परियोजना के तहत फुजैरा से इजराइल के हाइफा तक तेल और गैस को रेल और सड़क नेटवर्क के जरिए पहुंचाने की योजना है। वहीं कतर भी एलएनजी शिपमेंट को हॉर्मुज के बाहर के पोर्ट्स से डायवर्ट करने की तैयारी कर रहा है।
देश के भीतर भी मजबूत हो रही तैयारी
सरकार घरेलू स्तर पर भी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रही है। विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में मौजूद रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भरा जा रहा है, ताकि 90 दिनों तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा रूस, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से तेल आयात बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कुवैत के साथ बातचीत, भारतीयों की सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कुवैत के अपने समकक्ष शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिति और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा की। भारत सरकार ने साफ किया है कि विदेशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ऊर्जा संकट के बीच भारत का संतुलित दांव
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत ने एक संतुलित और बहुआयामी रणनीति अपनाई है। एक तरफ जहां वह कूटनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग और घरेलू भंडारण को भी मजबूत किया जा रहा है। आने वाले समय में यह रणनीति भारत को संभावित ऊर्जा संकट से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।