नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं देश के युवाओं को झकझोरने वाली हैं और अगर जवाबदेही तय नहीं की गई तो पेपर लीक जैसी घटनाएं रुकेंगी नहीं। वहीं केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं ताकि भविष्य में कोई चूक न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि UPSC जैसी परीक्षाओं में इस तरह की समस्या सामने नहीं आती, इसलिए NTA को उनसे सीखने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि युवाओं के भरोसे को टूटने नहीं दिया जा सकता और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा।
सरकार ने कहा- PM मोदी खुद रख रहे नजर
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। सरकार ने बताया कि 21 जून को होने वाले री-NEET एग्जाम के लिए कई नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जांच प्रक्रिया का पूरा ब्योरा
कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय से NEET-UG परीक्षा की पूरी जांच प्रक्रिया का विवरण मांगा है। साथ ही 2024 के पेपर लीक मामले के बाद गठित हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी से भी सवाल पूछा गया कि सुधारों के बावजूद इस बार ऐसी चूक क्यों हुई। समिति के प्रमुख और पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि ज्यादातर सिफारिशें लागू कर दी गई थीं और इस बार सामने आई कमजोरियों को री-एग्जाम से पहले दूर किया जा रहा है।
3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द
देशभर में NEET-UG परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। इसके बाद 7 मई को पेपर लीक की खबरें सामने आईं, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। आखिरकार 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और अब 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस पूरे मामले में केंद्र सरकार और CBI से भी जवाब मांगा गया है।
याचिका में NTA की जगह नई संस्था की मांग
FAIMA की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि बार-बार पेपर लीक होने से 22.7 लाख से ज्यादा छात्रों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। याचिका में मांग की गई है कि NTA की जगह एक मजबूत और स्वतंत्र परीक्षा संस्था बनाई जाए। साथ ही जब तक नई व्यवस्था लागू न हो, तब तक सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाए, जिसमें साइबर सिक्योरिटी और फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए।