राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देशभर में फैले एक बड़े आतंकी और हथियार तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है। एजेंसी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र में एक साथ 12 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पाकिस्तान से जुड़े ड्रोन हथियार तस्करी मॉड्यूल से संबंधित मामले में की जा रही है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान से जुड़े ऑपरेटिव जसवीर चौधरी और उसके भारतीय सहयोगियों पर ड्रोन के जरिए भारत में हथियार, गोला-बारूद और IED भेजने का आरोप है। माना जा रहा है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
4 राज्यों में एक साथ छापेमारी
एनआईए की टीमों ने उत्तर प्रदेश में 5, महाराष्ट्र में 3, राजस्थान में 2 और बिहार में 2 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान संदिग्ध डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क भारत-पाकिस्तान सीमा के जरिए ड्रोन के माध्यम से हथियार और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई कर रहा था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल पंजाब, दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में बड़े हमलों की साजिश के तहत किया जाना था।
देश में दहशत फैलाने की थी साजिश
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का मकसद आम लोगों को निशाना बनाकर देश में भय और अस्थिरता फैलाना था। एजेंसियों को शक है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों और गैंगस्टर नेटवर्क की मदद से यह पूरा मॉड्यूल ऑपरेट किया जा रहा था। एनआईए फिलहाल गिरफ्तार और फरार आरोपियों के बीच कनेक्शन खंगाल रही है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि देश के किन-किन राज्यों में इस नेटवर्क की जड़ें फैली हुई हैं।
सिरसा ग्रेनेड हमला मामले में भी बड़ा खुलासा
इसी बीच एनआईए ने हरियाणा के सिरसा महिला थाना ग्रेनेड हमला मामले में भी बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने दो पाकिस्तानी नागरिकों समेत कुल 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शाहजाद भट्टी के इशारे पर भारत में पुलिस ठिकानों को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी। आरोपियों के खिलाफ UAPA, भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने का आरोप
एनआईए के अनुसार, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलकर इस नेटवर्क से जोड़ा जा रहा था। एजेंसी फिलहाल इस पूरे मॉड्यूल के अंतरराष्ट्रीय लिंक और फंडिंग नेटवर्क की भी जांच कर रही है।