ईरान में सुप्रीम लीडर के निधन के बाद जिस प्रतिशोध की बात की जा रही थी, उसका पहला और बड़ा असर क्षेत्र में दिखाई दिया है। ईरान ने सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया था कि वह अपने नेता की मौत का बदला जरूर लेगा और इसी सिलसिले में उसने अमेरिकी सहयोगी देशों के खिलाफ तीव्र सैन्य कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। ईरान की ओर से कहा गया कि यह हमला उन देशों के लिए सख्त चेतावनी है जो क्षेत्र में उसके विरोधियों के साथ खड़े हैं।
दुबई और दोहा के ऊपर गूंजे धमाके
दुबई और दोहा में अचानक हुए जोरदार धमाकों ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। बताया जा रहा है कि विस्फोटों की आवाजें कई किलोमीटर दूर तक सुनी गईं। ईरान ने इन हमलों को प्रतिशोध की शुरुआत बताया है और साथ ही पड़ोसी मुल्कों को आगाह किया है कि यदि वे दुश्मन देशों के साथ मिलकर खड़े होंगे, तो परिणाम गंभीर होंगे। खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव इन विस्फोटों के बाद और अधिक बढ़ गया है।
अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाने की रणनीति
संयुक्त अरब अमीरात और कतर लंबे समय से अमेरिका के रणनीतिक साझेदार रहे हैं, और इसी वजह से ईरान ने इन्हें सीधे निशाने पर लिया है। ईरान ने दोहरे संदेश के साथ हमला किया है—पहला, अमेरिका को यह दिखाना कि उसके मित्र राष्ट्र अब सुरक्षित नहीं हैं, और दूसरा, खाड़ी देशों को यह चेतावनी देना कि किसी भी तरह का समर्थन ईरान के खिलाफ जाने पर उनके लिए नुकसानदेह साबित होगा। यह रणनीति क्षेत्रीय दबाव और शक्ति-संतुलन को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
IRGC का दावा: जहाज और सैन्य बेस तबाह
ईरान की सैन्य शाखा IRGC ने दावा किया है कि ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ के पांचवें चरण में जेबेल अली एंकरेज पर मौजूद अमेरिकी आपूर्ति जहाज को चार ड्रोन की मदद से पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। बताया गया है कि ड्रोन टक्कर के बाद जहाज में हुए धमाकों ने इसे बेकार कर दिया। इसके अलावा, ईरान का दावा है कि कुवैत के अब्दुल्ला मुबारक इलाके में स्थित अमेरिकी नेवल बेस पर 4 बैलिस्टिक मिसाइल और 12 ड्रोन दागे गए, जिनसे पूरा सैन्य ढांचा ध्वस्त हो गया और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए या घायल हुए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है, लेकिन घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है।
मिलिट्री कोऑर्डिनेशन और भविष्य के खतरे
IRGC नेवी और एयर फोर्स का संयुक्त अभियान इस बात का संकेत देता है कि ईरान आने वाले दिनों में और भी बड़े सैन्य ऑपरेशन करने की तैयारी में है। उनका कहना है कि दुश्मन यूनिट्स के लिए जहन्नुम के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे, जो यह दर्शाता है कि ईरान अब प्रतिरोध की नीति नहीं बल्कि आक्रामक जवाब देने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। इससे मिडिल ईस्ट में शक्ति-संतुलन बुरी तरह से प्रभावित होगा और व्यापक संघर्ष की आशंकाएँ और भी मजबूत हो जाएंगी।
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