ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तीखे शब्दों में कहा कि तेहरान अपनी सुरक्षा, सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूर्णतः तैयार है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल की ओर से हो रहे हमलों का सामना करने के लिए देश किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। अराघची ने यह टिप्पणी तब की जब हाल में राजधानी में बमबारी की घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है।
दो दशकों के अनुभव से ईरान का मजबूत रक्षा ढांचा
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान ने पिछले बीस वर्षों में अपने पूरब और पश्चिम में हुए संघर्षों का गहन अध्ययन किया है और उससे मिली सीख को अपने रक्षा ढांचे में शामिल किया है। उनका कहना था कि राजधानी पर बमबारी होने से ईरान की युद्ध क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि देश की मोजेक रक्षा संरचना पूरी तरह डीसेंट्रलाइज्ड है, जो यह तय करती है कि युद्ध कब और कैसे समाप्त होगा।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत ईरान का आत्मरक्षा का अधिकार
ईरान सरकार ने पुनः स्पष्ट किया कि उसने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया, न ही कोई युद्ध शुरू किया है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा ईरान का मूल अधिकार है। तेहरान ने कहा कि उसकी कार्रवाई केवल उन ठिकानों पर होती है, जहां से ईरान की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ हमले किए गए।
16वीं बार सैन्य कार्रवाई की घोषणा
तनाव के इसी क्रम में ईरान की प्रतिष्ठित सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत लगातार 16वीं बार सैन्य प्रहार करने की घोषणा की है। इस ऑपरेशन में ईरान के खिलाफ पिछले ड्रोन और मिसाइल हमलों का जवाब देते हुए उन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां अमेरिका और इज़रायल की सैन्य उपस्थिति बताई जाती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय चिंता
यह लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधि पश्चिम एशिया को और अधिक अस्थिर बना रही है। अमेरिका और इज़रायल की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रियाएं क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका तो इसके व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं, जिनमें ऊर्जा आपूर्ति से लेकर वैश्विक कूटनीतिक संबंधों पर असर शामिल है।
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