दुबई/वॉशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय राजनीति और समुद्री व्यापार के मोर्चे पर ईरान ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी के दावों के बीच, ईरान का एक विशाल तेल टैंकर 'ह्यूग' (Huge) अमेरिकी रडार और घेराबंदी को सफलतापूर्वक पार कर पूर्वी एशिया पहुँच गया है।
2000 करोड़ का तेल और सफल मिशन
'टैंकर ट्रैकर्स डॉट कॉम' और 'अल जजीरा' की रिपोर्ट के अनुसार, इस टैंकर में लगभग 19 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 22 करोड़ डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 2000 करोड़ रुपये) आंकी गई है। यह जहाज नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी का है और हाल ही में इसे इंडोनेशिया की लोंबोक जलडमरूमध्य (Lombok Strait) को पार करते हुए देखा गया है, जो अब दक्षिण चीन सागर के रियाउ द्वीप समूह की ओर बढ़ रहा है।
दावों और प्रतिदावों का दौर
ईरान और अमेरिका के बीच इस नाकेबंदी को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं:
ईरान का दावा: तेहरान ने 29 अप्रैल को दावा किया कि उनके 52 तेल टैंकर अमेरिकी घेराबंदी को चकमा देकर अपनी मंजिलों की ओर रवाना हो चुके हैं।
अमेरिका का दावा: पेंटागन और सेंट्रल कमांड का कहना है कि उन्होंने ईरान के 41 जहाजों को वापस भेज दिया है और ओमान की खाड़ी में 31 टैंकर अभी भी फंसे हुए हैं।
आर्थिक नुकसान और ट्रंप की चेतावनी
13 अप्रैल से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शुरू हुई इस नाकेबंदी के कारण ईरान को अब तक करीब 45,000 करोड़ रुपये (4.8 अरब डॉलर) का भारी नुकसान हुआ है। पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने आदेश दिया था कि हॉर्मुज से निकलने वाले हर उस जहाज को रोका जाए जिसका संबंध ईरानी बंदरगाहों से है।
तनाव बरकरार, हमले के संकेत
ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम घारीबाबादी ने कहा है कि तेहरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। दूसरी ओर, ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर लिखित स्पष्टीकरण की मांग की है और साथ ही फिर से सैन्य हमला शुरू करने के संकेत भी दिए हैं। 'ह्यूग' का यह सफल सफर अमेरिकी प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।