इजरायल ने अपने अत्याधुनिक ‘आयरन बीम’ लेजर डिफेंस सिस्टम को भविष्य की सैन्य तकनीक बताते हुए बड़े दावे किए थे, लेकिन ईरान के साथ चले 40 दिनों के युद्ध में इसका प्रभावी उपयोग देखने को नहीं मिला। मार्च में इजरायली सेना ने स्वीकार किया था कि ईरानी हमलों के खिलाफ इस सिस्टम का नियमित इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या इजरायल का बहुचर्चित लेजर हथियार अभी पूरी तरह तैयार नहीं है और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं दे पाया।
बैटरियों की कमी बनी सबसे बड़ी वजह
इजरायली वायु सेना यानी IAF ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आयरन बीम के सीमित इस्तेमाल की मुख्य वजह बैटरियों की कमी रही। वायु सेना के अनुसार इस सिस्टम को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए कम से कम 14 बैटरियों की आवश्यकता होती है, जबकि युद्ध के दौरान पर्याप्त संख्या उपलब्ध नहीं थी। इसी कारण इसका व्यापक उपयोग संभव नहीं हो सका। इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि तकनीकी विफलता से ज्यादा समस्या सिस्टम की पूर्ण तैनाती और लॉजिस्टिक तैयारियों से जुड़ी हुई थी।
रक्षा मंत्रालय के दावों पर उठे सवाल
इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में दावा किया था कि आयरन बीम को युद्धक्षेत्र में तैनात कर दिया गया है। हालांकि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि सिस्टम अभी पूरी तरह ऑपरेशनल स्थिति में नहीं पहुंच पाया था। एक ओर इसे आधुनिक रक्षा तकनीक की बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर युद्ध के दौरान इसका सीमित उपयोग विरोधाभास पैदा करता दिखाई दिया। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी नई सैन्य तकनीक को पूर्ण रूप से सक्रिय करने में समय और व्यापक परीक्षण की आवश्यकता होती है।
राफेल कंपनी और सेना ने लंबे समय तक साधी चुप्पी
आयरन बीम को विकसित करने वाली इजरायली रक्षा कंपनी ‘राफेल’ ने शुरुआती दौर में सिस्टम से जुड़ी समस्याओं पर कोई टिप्पणी नहीं की थी। कंपनी ने सभी सवाल रक्षा मंत्रालय की ओर भेज दिए थे, जबकि मंत्रालय की तरफ से भी लंबे समय तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इससे वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों और मीडिया के बीच अटकलें और तेज हो गईं। अब वायु सेना के बयान के बाद स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है कि समस्या तकनीकी विफलता नहीं बल्कि संसाधनों और तैनाती की थी।
‘लाइट बीम’ से शुरू हुई थी लेजर रक्षा प्रणाली
इजरायल ने जून 2025 में ‘लाइट बीम’ नामक छोटे लेजर सिस्टम के सक्रिय होने की घोषणा की थी, जिसे आयरन बीम का प्रारंभिक संस्करण माना जाता है। इसके बाद सितंबर 2025 में रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि आने वाले महीनों में आयरन बीम की पूरी बैटरी श्रृंखला तैनात कर दी जाएगी। हालांकि ईरान युद्ध के दौरान यह लक्ष्य पूरी तरह पूरा होता दिखाई नहीं दिया। विशेषज्ञों के अनुसार लेजर आधारित रक्षा प्रणालियों को बड़े स्तर पर लागू करना तकनीकी रूप से बेहद जटिल प्रक्रिया होती है।
ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट रोकने की क्षमता पर दुनिया की नजर
इजरायल का दावा है कि आयरन बीम भविष्य में ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट और मोर्टार जैसे खतरों को बेहद कम लागत और तेज गति से नष्ट करने में सक्षम होगा। रक्षा मंत्रालय ने पहले बताया था कि उसके लेजर सिस्टम ने अक्टूबर 2024 में हिजबुल्लाह के 40 ड्रोन मार गिराए थे। यदि यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है तो इससे आधुनिक युद्ध प्रणाली में बड़ा बदलाव आ सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब लेजर आधारित हथियार प्रणालियों के विकास पर तेजी से निवेश कर रहे हैं।