न्यू यॉर्क/नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान न्यू यॉर्क में आयोजित 'पार्सनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रोस्परिटी' (P4M) शिखर सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार और मजबूत बहुपक्षवाद की पुरजोर वकालत की है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए जयशंकर ने चेतावनी दी कि तीव्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनावों और जारी सशस्त्र संघर्षों के कारण वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था भारी दबाव का सामना कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर एकजुटता की अपील
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर संकट मंडरा रहा हो, तब बहुपक्षवाद (Multilateralism) को अपनी भूमिका और अधिक मजबूती से निभानी होगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, महामारी की तैयारी, आपदा प्रबंधन, नई तकनीक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) जैसे मुद्दों का समाधान कोई भी देश अकेले नहीं निकाल सकता। इसके लिए विश्व के सभी राष्ट्रों को एक साथ मिलकर साझा प्रयास करने होंगे।
'4F संकट' और आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकाधिकार पर जताई चिंता
जयशंकर ने अपने संबोधन में दुनिया के सामने खड़े '4F संकट'—यानी ईंधन (Fuel), भोजन (Food), उर्वरक (Fertiliser) और वित्त (Finance)—का विशेष रूप से उल्लेख किया।
- जोखिम कम करने की नीति: उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं पर किसी एक देश के दबदबे या रुकावट के खतरे से बचने के लिए विविधता (Diversification) और जोखिम कम करने (De-risking) के उपायों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन: विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि बहुपक्षवाद तभी प्रभावी होगा जब सभी देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियमों और मानदंडों का निष्ठापूर्वक पालन करेंगे।
'P4M' पहल: सुधारों के लिए एक लचीला और खुला मंच
यूरोपीय संघ (EU), ब्राजील, केन्या और कनाडा द्वारा शुरू की गई 'P4M' (Partners for Multilateralism) पहल को एक नया अंतरराष्ट्रीय गुट बनाने के बजाय एक खुला और लचीला ढांचा बताया गया है।
- उद्देश्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक मतभेदों से परे जाकर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र (UN) में सुधारों के लिए देशों का एक मजबूत गठबंधन तैयार करना है।
- वर्तमान चुनौतियां: एक संयुक्त संपादकीय में नेताओं ने रेखांकित किया कि 2025 में 1946 के बाद से सर्वाधिक (35 देशों में) राज्य-स्तरीय सशस्त्र संघर्ष दर्ज किए गए और वैश्विक सैन्य खर्च रिकॉर्ड लगभग $3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
'सुधारित बहुपक्षवाद' और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की आवश्यकता
एस. जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में दुनिया का विश्वास बहाल करने के लिए अधिक भागीदारीपूर्ण विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय लेने की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है।उन्होंने दोहराया कि जब तक वैश्विक संस्थाओं की संरचना में बदलाव कर उन्हें अधिक समावेशी नहीं बनाया जाएगा, तब तक वर्तमान अंतरराष्ट्रीय संकटों और गुटबाजी से निपटना मुश्किल होगा।