भोपाल डेस्क: यूक्रेन की सेना ने रात भर रूस पर एक हजार से अधिक ड्रोन से हमले किए। इनमें सौ ड्रोन रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाकर दागे गए। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। मॉस्को के महापौर ने इसे रूस की राजधानी को निशाना बनाकर किया गया अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया है। इस हमले में मॉस्को तेल रिफाइनरी और एक आवासीय इमारत को क्षति पहुंची। स्थानीय गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव ने बताया कि मॉस्को के आस-पास के इलाके में हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई और बीस लोग घायल हो गए।
जेलेंस्की का बयान
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कीव ने इस हमले में कई तरह की मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया। इनमें यूक्रेन में निर्मित फ्लेमिंगो और पेलिकन मिसाइलें भी शामिल हैं। यह हमला युद्ध के बीच रूस में हो रहे पहले संसदीय चुनाव के तीसरे और आखिरी दिन हुआ। चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नीतियों के खिलाफ विपक्ष की मौजूदगी लगभग नहीं के बराबर रही है।
रूसी चुनाव और विवादित क्षेत्र
युद्ध के बीच रूस में यह पहला संसदीय चुनाव है जिसके लिए मतदान जारी है। इससे क्रेमलिन के प्रभुत्व के और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। रूस उन चार यूक्रेनी इलाकों में भी मतदान करवा रहा है जिन पर मॉस्को ने युद्ध शुरू होने के बाद कब्जा कर लिया था लेकिन अब भी उसका उन पर पूरा नियंत्रण नहीं है। साथ ही क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है जो काला सागर का प्रायद्वीप है और जिस पर रूस ने 2014 में कब्जा कर लिया था। कीव ने इस कदम को गैर-कानूनी बताया है।
हमले का असर और प्रतिक्रिया
मॉस्को तेल रिफाइनरी और एक आवासीय इमारत को क्षति पहुंची है। आस-पास के इलाकों में दो मौतें और बीस घायल होने की खबर है। यह हमला रूसी संसदीय चुनाव के आखिरी दिन हुआ जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। यूक्रेन की ओर से इसे बड़े पैमाने का हमला बताया जा रहा है जबकि रूसी अधिकारी इसे राजधानी पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बता रहे हैं। दोनों पक्षों के बयान युद्ध की तीव्रता को दर्शाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और आगे की स्थिति
यह हमला चल रहे युद्ध के बीच हुआ है जिसमें दोनों पक्ष लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। चुनाव के दौरान हुए इस हमले ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। विवादित क्षेत्रों में मतदान को लेकर कीव का विरोध जारी है। वैश्विक स्तर पर इस घटना की निगरानी की जा रही है क्योंकि इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। दोनों देशों के बीच शांति प्रयासों की कोई ताजा प्रगति सामने नहीं आई है।