कोटा। राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और कई मौतों के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या सिजेरियन डिलीवरी के दौरान सच में किडनी फेल होने का खतरा होता है? डॉक्टरों के मुताबिक, सीजेरियन डिलीवरी (C-Section) एक बड़ी सर्जरी होती है और इसमें संक्रमण फैलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। हालांकि हर सिजेरियन डिलीवरी में किडनी फेल होने का खतरा नहीं होता, लेकिन संक्रमण और सेप्सिस जैसी जटिलताएं खतरा बढ़ा सकती हैं।
कोटा में बढ़े मामले, कई महिलाओं की हालत गंभीर
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में पिछले कुछ दिनों में कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी है। अब तक चार महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई महिलाओं में किडनी फेल होने, ब्लड प्रेशर गिरने और संक्रमण जैसी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। कुछ मरीजों का ICU और डायलिसिस पर इलाज जारी है। मामले की जांच के लिए जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कोटा पहुंची है।
कैसे बढ़ता है संक्रमण का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, सिजेरियन डिलीवरी के बाद सबसे बड़ा खतरा संक्रमण (Infection) का होता है। अगर बैक्टीरिया शरीर में फैलकर खून तक पहुंच जाएं, तो सेप्सिस की स्थिति बन सकती है। सेप्सिस में शरीर के कई अंग प्रभावित होने लगते हैं और सबसे पहले असर किडनी पर दिखाई देता है। ऐसे में किडनी ठीक से काम करना बंद कर सकती है और मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है।
क्यों ज्यादा संवेदनशील होती है C-Section डिलीवरी?
डॉक्टरों का कहना है कि सी सेक्शन के दौरान पेट और गर्भाशय की कई परतों को काटा जाता है। यही वजह है कि सामान्य डिलीवरी की तुलना में इसमें:
संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है
ब्लीडिंग बढ़ सकती है
ब्लड क्लॉट बनने का रिस्क रहता है
पोस्ट ऑपरेटिव जटिलताएं बढ़ जाती हैं
खासतौर पर एनीमिया, डायबिटीज, मोटापा या लंबे समय तक लेबर पेन से जूझ रही महिलाओं में जोखिम ज्यादा होता है।
समय पर इलाज जरूरी
डॉक्टरों के मुताबिक, सर्जरी के बाद अगर तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत, ब्लड प्रेशर गिरना या पेशाब कम होना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है।