नई दिल्ली : आमतौर पर जब हम सिगरेट या तंबाकू से होने वाले जानलेवा नुकसानों की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में उन लोगों की तस्वीर आती है जो दिनभर में डिब्बी की डिब्बी फूंक देते हैं (Chain Smokers)। इसी सोच का फायदा उठाकर आज की युवा पीढ़ी खुद को 'सोशल स्मोकर' (Social Smoker) या 'अकेजनल स्मोकर' (Occasional Smoker) कहकर सुरक्षित मान लेती है। वीकेंड की पार्टियां, दोस्तों का साथ, या ऑफिस के काम का तनाव—इन मौकों पर एक-दो सिगरेट के कश लगाने को लोग बिल्कुल हानिरहित समझते हैं।
लेकिन अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो सावधान हो जाइए। चिकित्सा विज्ञान और हालिया शोध इस धारणा को पूरी तरह से गलत और बेहद खतरनाक साबित कर चुके हैं। सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक रासायनिक तत्व** होते हैं, जिनमें से दर्जनों सीधे तौर पर कैंसर के लिए जिम्मेदार (Carcinogens) और अत्यंत जहरीले होते हैं। आपका शरीर यह नहीं देखता कि आप रोज पी रहे हैं या कभी-कभार, जहर अंदर जाते ही अपना काम शुरू कर देता है।
दिल और रक्तधमनियों पर तत्काल हमला
हमारा कार्डियोवैस्कुलर (रक्त संचरण) तंत्र तंबाकू के धुएं के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। सिगरेट का कश खींचने के महज कुछ ही मिनटों के भीतर शरीर में ये खतरनाक बदलाव होते हैं:
निकोटीन का असर: निकोटीन शरीर में जाते ही रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को सिकोड़ देता है, जिससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर अचानक से बढ़ जाता है।
ऑक्सीजन की भारी कमी: धुएं के साथ अंदर पहुंची कार्बन मोनोऑक्साइड खून में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर देती है। नतीजतन, दिल को शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सामान्य से कई गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
रिसर्च के मुताबिक, जो लोग दिन में महज 1 से 4 सिगरेट या उससे भी कम पीते हैं, उनमें दिल की बीमारियों का खतरा धूम्रपान न करने वालों की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इससे धमनियों में ब्लॉकेज होने और ब्लड क्लॉट (खून का थक्का जमने) की प्रवृत्ति बढ़ती है, जिससे अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ सकता है।
फेफड़ों पर पड़ता है सीधा असर
जब आप सिगरेट का धुआं अंदर खींचते हैं, तो फेफड़े सीधे जहरीली गैसों के संपर्क में आते हैं। भले ही आप कभी-कभार स्मोकिंग करते हों, यह श्वसन नली में गंभीर सूजन (Inflammation) पैदा करता है। इसके चलते सोशल स्मोकर्स में ये लक्षण साफ दिखने लगते हैं:
लगातार या क्रॉनिक खांसी होना।
सीने के अंदर से घरघराहट या सीटी जैसी आवाज (Wheezing) आना।
थोड़ी सी शारीरिक मेहनत या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना।
बार-बार सर्दी-खांसी या फेफड़ों में संक्रमण (Respiratory Infections) होना।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में रोकी जा सकने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण तंबाकू है। हर साल तंबाकू के कारण 80 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है।
कैंसर का खतरा: पहले कश से ही शुरू हो जाती है तबाही
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर होने के लिए बरसों तक सिगरेट पीना जरूरी नहीं है। धुएं में मौजूद कार्सिनोजेनिक तत्व बेहद कम समय में ही हमारे सेल्स के डीएनए (DNA) को डैमेज कर सकते हैं। यह डैमेज धीरे-धीरे शरीर में जमा होता रहता है और बाद में ट्यूमर या कैंसर का रूप ले लेता है।
तंबाकू का धुआं न केवल फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) बल्कि भोजन नली, मूत्राशय, मुंह और गले के कैंसर के लिए भी उतना ही जिम्मेदार है। कैंसर का खतरा इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितनी सिगरेट पीते हैं, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि आपका शरीर इस जहर के संपर्क में आ भी रहा है या नहीं।
लत का अदृश्य जाल (Nicotine Dependence)
सोशल स्मोकर्स अक्सर दावा करते हैं कि वे जब चाहें सिगरेट छोड़ सकते हैं और उन्हें इसकी लत नहीं है। लेकिन यह भूलना भारी भूल होगी कि निकोटीन दुनिया के सबसे खतरनाक एडिक्टिव पदार्थों में से एक है। कभी-कभार इसका इस्तेमाल भी दिमाग के 'रिवॉर्ड पाथवे' को बदल देता है। जो स्मोकिंग आज सिर्फ शनिवार-रविवार की महफिल तक सीमित है, वह कब रोज की मजबूरी बन जाती है, इंसान को पता भी नहीं चलता। आज के अधिकांश चेन स्मोकर्स ने कभी सोशल स्मोकर के तौर पर ही शुरुआत की थी।
तंबाकू या धूम्रपान का कोई 'सेफ लेवल' (सुरक्षित स्तर) नहीं होता है।
दिन में सिर्फ 1 सिगरेट भी आपके दिल को बीमार करने के लिए काफी है।
कभी-कभार पीने से भी फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचता है।
मात्रा कम करने से बात नहीं बनेगी, सेहतमंद जिंदगी के लिए सिगरेट को आज ही पूरी तरह 'ना' कहें।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सामान्य जन जागरूकता और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के आधार पर तैयार की गई है। धूम्रपान छोड़ने या निकोटीन की लत से मुक्ति पाने के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ डॉक्टर या काउंसलर की सलाह लें।