कॉफी को लंबे समय से ऊर्जा और ताजगी देने वाले पेय के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन अब इसमें प्रोटीन पाउडर मिलाकर पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। ‘प्रोफी’ के नाम से लोकप्रिय यह पेय मूल रूप से कॉफी और प्रोटीन पाउडर का मिश्रण है, जिसे खासतौर पर जिम जाने वाले और व्यायाम करने वाले लोग सुविधाजनक विकल्प के रूप में देखते हैं। इसका आकर्षण इस बात में है कि एक ही पेय से कैफीन और प्रोटीन दोनों हासिल करने का दावा किया जाता है। व्यस्त दिनचर्या में अलग से कॉफी और प्रोटीन पेय तैयार करने की जरूरत नहीं रहती। हालांकि, किसी भी लोकप्रिय खान-पान के चलन की तरह यहां भी यह समझना जरूरी है कि सुविधा और वास्तविक पोषण लाभ हमेशा एक ही बात नहीं होते।
लॉकडाउन के दौर में बढ़ा घर पर नए पेय बनाने का चलन
कॉफी से जुड़े नए प्रयोगों की लोकप्रियता को कोविड-19 महामारी के दौरान भी एक बड़ा बढ़ावा मिला था। उस समय डलगोना कॉफी ने सोशल मीडिया और घरों की रसोई में खास जगह बनाई थी। पारसी फेटेली यानी फेंटी हुई कॉफी से मिलती-जुलती इस शैली ने लोगों को घर पर अलग तरह के कॉफी पेय तैयार करने के लिए प्रेरित किया। इसी दौर में प्रोटीन पाउडर और कॉफी को मिलाकर पेय तैयार करने का चलन भी सामने आया, जो बाद में फिटनेस समुदाय में ज्यादा लोकप्रिय हुआ। शुरुआत में यह घरेलू प्रयोग जैसा था, लेकिन धीरे-धीरे इसे व्यायाम के बाद या दिन की शुरुआत में प्रोटीन लेने के आसान तरीके के रूप में देखा जाने लगा। सोशल मीडिया और फिटनेस संस्कृति ने इस साधारण मिश्रण को एक चर्चित खाद्य चलन बनाने में अहम भूमिका निभाई।
प्रोफी तैयार करने का तरीका है बेहद आसान
प्रोफी बनाने के लिए सामान्यतः पहले कॉफी तैयार की जाती है और फिर उसे ठंडा होने दिया जाता है। इसके बाद उसमें पसंद के अनुसार प्रोटीन पाउडर मिलाया जाता है। बहुत गर्म कॉफी में सीधे प्रोटीन पाउडर डालने पर वह अच्छी तरह घुलने के बजाय गुठलियां बना सकता है और पेय की बनावट असमान हो सकती है। इसलिए कॉफी को पहले ठंडा करना अधिक सुविधाजनक माना जाता है। प्रोटीन पाउडर को कॉफी में अच्छी तरह मिलाने के लिए चम्मच, स्टिरर या फ्रोथर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कोई एक तय विधि नहीं है और लोग स्वाद तथा जरूरत के अनुसार दूध, बर्फ या स्वादयुक्त सिरप भी मिला देते हैं।
हर प्रोफी एक जैसा पौष्टिक नहीं होता
प्रोफी को केवल नाम के आधार पर स्वस्थ पेय मान लेना सही नहीं होगा, क्योंकि इसकी पोषण गुणवत्ता इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री पर काफी निर्भर करती है। यदि इसमें बिना अतिरिक्त चीनी वाला प्रोटीन पाउडर और सीमित मात्रा में दूध इस्तेमाल किया जाए तो यह अपेक्षाकृत संतुलित पेय हो सकता है। लेकिन स्वाद बढ़ाने के लिए अधिक मात्रा में मीठे सिरप, चीनी, क्रीम या उच्च कैलोरी वाले दूध का इस्तेमाल करने पर इसकी कुल ऊर्जा और चीनी की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है। इसी तरह अलग-अलग प्रोटीन पाउडरों में प्रोटीन के साथ अन्य पोषक तत्व और अतिरिक्त सामग्री की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए प्रोफी का वास्तविक लाभ उसके नाम से नहीं, बल्कि उसकी पूरी सामग्री और व्यक्ति की दैनिक पोषण जरूरत से तय होता है।
प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति के लिए अलग होती है
प्रोटीन शरीर के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है और मांसपेशियों की मरम्मत तथा निर्माण में इसकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। नियमित व्यायाम या शक्ति प्रशिक्षण करने वाले लोगों में प्रोटीन की जरूरत सामान्य निष्क्रिय व्यक्ति की तुलना में अधिक हो सकती है। ऐसे में प्रोटीन पाउडर को कॉफी के साथ मिलाने से एक सुविधाजनक पेय जरूर तैयार हो सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति को अतिरिक्त प्रोटीन पाउडर की आवश्यकता है। यदि किसी व्यक्ति के भोजन में पहले से पर्याप्त दाल, दूध, दही, अंडे, मछली, मांस, सोया या अन्य प्रोटीन स्रोत मौजूद हैं तो केवल चलन के कारण अतिरिक्त प्रोटीन लेना जरूरी नहीं है। आहार की कुल संरचना को ध्यान में रखकर ही यह तय करना बेहतर होता है कि प्रोफी वास्तव में उपयोगी है या केवल एक लोकप्रिय पेय है।
कैफीन के फायदे के साथ मात्रा का भी रखना होगा ध्यान
कॉफी में मौजूद कैफीन सतर्कता और जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकता है और व्यायाम करने वाले कुछ लोगों को इससे अस्थायी रूप से ऊर्जा तथा प्रदर्शन में लाभ महसूस हो सकता है। यही कारण है कि कॉफी को व्यायाम से पहले लेने का चलन काफी पुराना है। लेकिन कैफीन का प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता और अधिक मात्रा बेचैनी, नींद में परेशानी, दिल की धड़कन तेज महसूस होने या अन्य असुविधाओं का कारण बन सकती है। खासकर शाम या रात में प्रोफी लेने पर नींद प्रभावित हो सकती है। इसलिए इसमें प्रोटीन होने का मतलब यह नहीं कि कैफीन की मात्रा को नजरअंदाज किया जा सकता है। दिनभर में चाय, कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त पेयों से मिलने वाली कुल मात्रा पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
क्या व्यायाम के बाद प्रोफी लेना जरूरी है?
फिटनेस समुदाय में प्रोफी को अक्सर व्यायाम के बाद लेने वाले सुविधाजनक पेय के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसे अनिवार्य पोषण विकल्प मानने की जरूरत नहीं है। व्यायाम के बाद शरीर को पर्याप्त प्रोटीन के साथ ऊर्जा, तरल पदार्थ और अन्य पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। केवल कॉफी और प्रोटीन पाउडर का मिश्रण हर व्यक्ति की इन जरूरतों को पूरा नहीं करता। यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने का समय नहीं मिल रहा है तो प्रोफी कुछ परिस्थितियों में सुविधाजनक विकल्प बन सकता है। लेकिन नियमित भोजन का स्थान इसे नहीं लेना चाहिए। संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और व्यक्ति की व्यायाम दिनचर्या के अनुरूप कुल प्रोटीन सेवन को प्राथमिकता देना अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रोफी का असली फायदा सुविधा में छिपा है
प्रोफी को लेकर सबसे मजबूत तर्क शायद इसका पोषण से ज्यादा सुविधाजनक होना है। व्यस्त जीवनशैली वाले व्यक्ति के लिए एक ऐसा पेय तैयार करना आसान हो सकता है जिसमें कॉफी और प्रोटीन दोनों शामिल हों। इसे घर पर कुछ ही समय में तैयार किया जा सकता है और इसकी सामग्री भी अपनी पसंद के अनुसार बदली जा सकती है। लेकिन सुविधा को स्वास्थ्य लाभ का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए। यदि पेय में अत्यधिक चीनी, स्वादयुक्त सिरप या अनावश्यक अतिरिक्त कैलोरी शामिल हो जाएं तो इसका पोषण संतुलन बदल सकता है। इसलिए प्रोफी को किसी चमत्कारी फिटनेस पेय के बजाय अपने दैनिक आहार में जरूरत के अनुसार शामिल किया जाने वाला एक सुविधाजनक विकल्प समझना अधिक व्यावहारिक होगा।
चलन से ज्यादा जरूरी है संतुलित आहार
प्रोफी का बढ़ता चलन यह जरूर दिखाता है कि लोग अपने भोजन और फिटनेस के बीच नए संयोजन तलाश रहे हैं। कॉफी और प्रोटीन का मेल कुछ लोगों के लिए उपयोगी और सुविधाजनक हो सकता है, खासकर तब जब उन्हें अतिरिक्त प्रोटीन की वास्तविक जरूरत हो और वे अपनी कुल कैफीन तथा कैलोरी की मात्रा पर नियंत्रण रखें। लेकिन किसी भी खाद्य चलन को केवल सामाजिक लोकप्रियता के आधार पर स्वास्थ्यवर्धक मानना उचित नहीं है। व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि, भोजन की पूरी संरचना और व्यक्तिगत जरूरतें इसके उपयोग को प्रभावित करती हैं। इसलिए प्रोफी को फिटनेस का अनिवार्य हिस्सा बनाने के बजाय संतुलित आहार और सही पोषण योजना के भीतर एक विकल्प के रूप में देखना अधिक समझदारी होगी।