पेट शरीर का एक अहम हिस्सा है और कहा जाता है कि अगर पेट स्वस्थ है, तो कई बीमारियां अपने आप दूर हो जाती हैं। लेकिन आधुनिक जीवनशैली और अनियमित आहार की वजह से पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे भूख न लगना, गैस, एसिडिटी, अपच और पेट भारीपन आम हो गई हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन समस्याओं से बिना दवाइयों के भी छुटकारा पाया जा सकता है। इसका जवाब है — उपवास।
उपवास: सजा नहीं, बल्कि औषधि
उपवास को अक्सर सिर्फ भूखे रहने की सजा समझा जाता है, जबकि यह शरीर के लिए प्राकृतिक औषधि का काम करता है। दवाएं अस्थायी राहत देती हैं, लेकिन लंबे समय में उनका असर कम हो सकता है। वहीं उपवास शरीर को अंदर से साफ करने और पाचन तंत्र को आराम देने का अवसर देता है।
पाचन तंत्र को मिलता है आराम
उपवास पेट की गहराई से सफाई करता है, पाचन तंत्र को आराम देता है और शरीर को खुद को रिपेयर करने की प्रक्रिया शुरू करने में मदद करता है। यह एक प्राकृतिक तरीका है जो कई बार दवाओं से भी बेहतर काम करता है।
उपवास कैसे शुरू करें
उपवास की शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए। शुरुआत में महीने में एक या दो बार, जैसे एकादशी के दिन उपवास करना उपयुक्त होता है। शुरुआत में फलाहार लेना बेहतर रहता है। फल उतने ही खाएं जितना शरीर को ऊर्जा देने के लिए जरूरी हो, ज्यादा मात्रा में न लें। इसके साथ शहद मिला पानी, नारियल पानी और पर्याप्त सादा पानी पीना फायदेमंद है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
कमजोरी का डर सिर्फ भ्रम है
कई लोग सोचते हैं कि उपवास से शरीर कमजोर हो जाएगा, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ मानसिक भ्रम है। भोजन से शरीर को मिलने वाली कुल ऊर्जा का केवल 30–40% हिस्सा ही भोजन से आता है, बाकी ऊर्जा पानी, हवा और पर्याप्त आराम से मिलती है। इसलिए उपवास से कमजोरी का डर बेकार है।
वैज्ञानिक शोध भी देता है पुष्टि
उपवास के फायदे केवल परंपरा तक सीमित नहीं हैं। जापान के वैज्ञानिकों ने 2018 में शोध किया कि उपवास के दौरान शरीर खराब और कमजोर कोशिकाओं को हटाकर नई और स्वस्थ कोशिकाएं बनाता है। इस प्रक्रिया को ‘ऑटोफैगी’ कहते हैं। यही वजह है कि उपवास को सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी प्रभावी तरीका माना जाता है।
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