इंदौर. मध्य प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी इंदौर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक महत्वपूर्ण आयोजन का साक्षी बन रहा है। ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने इस शहर को वैश्विक कृषि विमर्श का केंद्र बना दिया है। ऐसे समय में जब दुनिया खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। सम्मेलन केवल सदस्य देशों के बीच संवाद का मंच नहीं है, बल्कि यह भविष्य की कृषि नीतियों और सहयोग के नए आयामों को भी दिशा देने वाला आयोजन माना जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता में बढ़ी सम्मेलन की अहमियत
इस वर्ष ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता भारत के पास होने के कारण सम्मेलन की महत्ता और अधिक बढ़ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि विश्व की बड़ी आबादी ब्रिक्स देशों में निवास करती है और वैश्विक कृषि उत्पादन, खाद्य आपूर्ति तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इन देशों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में भारत द्वारा कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर साझा रणनीति तैयार करने की पहल को दूरगामी दृष्टि से देखा जा रहा है। यह सम्मेलन विकासशील देशों की कृषि आवश्यकताओं को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।
छोटे किसानों की समृद्धि बना चर्चा का मुख्य विषय
सम्मेलन के केंद्र में छोटे और सीमांत किसानों की स्थिति को मजबूत बनाने का मुद्दा रखा गया है। कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच इस बात पर चर्चा हो रही है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में छोटे किसानों की आय कैसे बढ़ाई जाए और उन्हें आधुनिक कृषि संसाधनों तक कैसे पहुंचाया जाए। किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, लागत कम करने और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए सदस्य देशों के सफल अनुभवों को साझा करने की प्रक्रिया भी जारी है।
खाद्य सुरक्षा और पोषण पर विशेष जोर
ब्रिक्स देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बढ़ती आबादी के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। सम्मेलन में इस बात पर विशेष बल दिया जा रहा है कि कृषि का उद्देश्य केवल अधिक उत्पादन करना नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को पोषणयुक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। खाद्यान्न सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की कृषि नीति में गुणवत्ता और पोषण को उत्पादन के बराबर महत्व देना अनिवार्य होगा।
तकनीक, नवाचार और युवाओं की भूमिका पर मंथन
कृषि क्षेत्र तेजी से तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन में डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान, आधुनिक सिंचाई प्रणाली और नवाचारों पर भी चर्चा की जा रही है। युवाओं को कृषि क्षेत्र से जोड़ने तथा उन्हें नई तकनीकों के उपयोग के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान और तकनीक आधारित उपायों को बढ़ावा देने पर भी सदस्य देशों के प्रतिनिधि अपने विचार साझा कर रहे हैं। यह माना जा रहा है कि भविष्य की कृषि तकनीक-संचालित और ज्ञान-आधारित होगी।
महिलाओं की भागीदारी और ग्रामीण विकास पर फोकस
सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं का योगदान लगातार बढ़ रहा है और उन्हें संसाधनों, प्रशिक्षण तथा वित्तीय सहायता तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रतिनिधियों ने इस बात पर चर्चा की कि महिला किसानों को सशक्त बनाकर कृषि उत्पादन और ग्रामीण विकास दोनों को नई गति दी जा सकती है। कृषि क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना भी सम्मेलन के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल है।
सांस्कृतिक विरासत से जुड़ेगा वैश्विक प्रतिनिधिमंडल
ब्रिक्स देशों से आए प्रतिनिधियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने की भी विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत उन्हें मांडू का भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे प्रदेश की स्थापत्य कला, सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से देख सकेंगे। यह पहल केवल औपचारिकता नहीं बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जा रही है, जिसके जरिए भारत अपनी विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय विश्व समुदाय को दे रहा है।
घोषणा पत्र से तय होगी भविष्य की दिशा
सम्मेलन के समापन पर जारी होने वाला ब्रिक्स घोषणा पत्र कृषि क्षेत्र में सदस्य देशों के साझा दृष्टिकोण और प्रतिबद्धताओं को प्रतिबिंबित करेगा। उम्मीद की जा रही है कि इसमें छोटे किसानों की समृद्धि, खाद्य सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, जलवायु अनुकूल कृषि और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन के निष्कर्ष आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि नीति और विकासशील देशों की कृषि रणनीतियों को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।