उज्जैन - श्रावण मास के पहले सोमवार पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का महासागर उमड़ेगा। भगवान महाकाल की पारंपरिक पहली सवारी आज शाम 4 बजे मंदिर के सभामंडप से विधि-विधान और विशेष पूजन के बाद निकलेगी। बाबा महाकाल राजाधिराज के स्वरूप में पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे और अपनी प्रजा का हाल जानेंगे। सवारी के स्वागत के लिए पूरे शहर को आकर्षक रोशनी, फूलों और धार्मिक सजावट से सजाया गया है, जबकि हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
पहली सवारी की थीम 'वैदिक उद्बोधन', शिप्रा तट पर होगा विशेष अनुष्ठान
इस वर्ष श्रावण और भादौ माह की सभी सवारियों के लिए अलग-अलग थीम निर्धारित की गई है। पहली सवारी की थीम 'वैदिक उद्बोधन' रखी गई है। सवारी के शिप्रा तट पहुंचने पर 1100 वैदिक बटुकों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष अर्चना की जाएगी। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण रहेगा।
महाकाल मंदिर से शुरू होकर इन मार्गों से निकलेगी सवारी
महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप से पूजन-अर्चन के बाद सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी, बक्षी बाजार होते हुए शिप्रा तट पहुंचेगी। यहां विशेष पूजन के बाद वापसी में रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
1200 पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
श्रावण मास की पहली सवारी और पहले सोमवार को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे रूट पर करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। ट्रैफिक व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
हर सवारी होगी खास, राजसी सवारी में होगी ड्रोन से पुष्प वर्षा
इस बार श्रावण में चार और भादौ में दो सवारियां निकाली जाएंगी। 10 अगस्त को लोकनृत्य, 17 अगस्त को पुलिस-आर्मी एवं बैंड की प्रस्तुतियां, 24 अगस्त को पर्यावरण संरक्षण, 31 अगस्त को 84 महादेव की झांकियां और 7 सितंबर को निकलने वाली राजसी सवारी में सिंहस्थ महापर्व की झांकी के साथ ड्रोन से पुष्प वर्षा भी की जाएगी।