कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव में नामांकन पत्र निरस्त होने का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंचने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग से राहत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने इस मामले में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) दायर करने की तैयारी तेज कर दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संकेत दिए हैं कि पार्टी इसी सप्ताह हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकती है।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी अंतिम चरण में
चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी सभी आदेशों की प्रमाणित प्रतियां (सर्टिफाइड कॉपी) संलग्न करना अनिवार्य होता है। इन दस्तावेजों को प्राप्त करने और याचिका का कानूनी मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की जा सकती है।
राज्यसभा चुनाव पर पड़ सकता है बड़ा असर
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह है कि यदि हाईकोर्ट मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो राज्यसभा चुनाव में विजयी घोषित अन्य उम्मीदवारों की सदस्यता भी प्रभावित हो सकती है।
जीतने वाले सभी प्रत्याशी बनेंगे पक्षकार
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा के अनुसार, चुनाव कानून के तहत नामांकन निरस्तीकरण से जुड़ी याचिका में चुनाव जीतने वाले सभी उम्मीदवारों को पक्षकार बनाना आवश्यक होता है। इसलिए इस मामले में निर्वाचित सभी प्रत्याशी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
फैसला मीनाक्षी के पक्ष में आया तो रद्द हो सकता है चुनाव
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि अदालत यह मान लेती है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन गलत तरीके से निरस्त किया गया था, तो संबंधित राज्यसभा चुनाव को निरस्त किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में विजयी उम्मीदवारों की सदस्यता समाप्त हो सकती है और सीटों पर दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिका का रास्ता बताया था
नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर राहत की मांग की थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में सीधे रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा था कि इस तरह के मामलों में चुनाव याचिका ही उचित कानूनी उपाय है।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कांग्रेस अब हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर नामांकन निरस्तीकरण को चुनौती देने जा रही है। ऐसे में इस मामले पर आने वाला फैसला मध्यप्रदेश की राज्यसभा राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकता है और चुनाव परिणामों पर भी असर पड़ सकता है।